घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 5 क्या है


घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 5 क्या है

आज हम आपके लिए इस पेज पर घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) की धारा 5 की जानकारी लेकर आये है | यहाँ हम आपको बताएँगे कि घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) की धारा 5 किस प्रकार से परिभाषित की गई है और इसका क्या अर्थ है ? घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 5 क्या है, इसके बारे में आप यहाँ जानेंगे |

पुलिस अधिकारियों, सेवा प्रदाताओं और मजिस्ट्रेट के कर्त्तव्य

इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ धारा 5 क्या बताती है ? इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी | साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) की महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

[Domestic violence act Sec. 5 in Hindi]



घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 2 क्या है

Domestic Violence (घरेलू हिंसा अधिनियम) की धारा 5 के अनुसार :-

पुलिस अधिकारियों, सेवा प्रदाताओं और मजिस्ट्रेट के कर्त्तव्य

कोई पुलिस अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता या मजिस्ट्रेट, जिसे घरेलू हिंसा की कोई शिकायत प्राप्त हुई है या जो घरेलू हिंसा की किसी घटना के स्थान पर अन्यथा उपस्थित है या जब घरेलू हिंसा की किसी घटना की रिपोर्ट उसको दी जाती है तो वह, व्यथित व्यक्ति को-

(क) इस अधिनियम के अधीन, किसी संरक्षण आदेश, धनीय राहत के लिए किसी आदेश, किसी अभिरक्षा आदेश, किसी निवास आदेश, किसी प्रतिकर आदेश या ऐसे एक आदेश से अधिक के रूप में किसी राहत को अभिप्राप्त करने के लिए आवेदन करने के उसके अधिकार की;

(ख) सेवा प्रदाताओं की सेवाओं की उपलब्धता की;

(ग) संरक्षण प्रदाताओं की सेवाओं की उपलब्धता की;

(घ) विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अधीन निःशुल्क विधिक सेवा केउसके अधिकार की;

(ङ) जहाँ कहीं सुसंगत हो, भारतीय दंड संहिता की धारा 498 क के अधीन किसी परिवाद के फाइल करने के उसके अधिकार की, जानकारी देगा:

परन्तु इस अधिनियम की किसी बात का किसी रीति में यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी पुलिस अधिकारी को किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने के बारे में जानकारी प्राप्त होने पर विधि के अनुसार कार्यवाही करने के लिए, अपने कर्तव्य से अवमुक्त करती है।

According to Section 5 –    “Duties of police officers, service providers and Magistrate”–

A police officer, Protection Officer, service provider or Magistrate who has received a complaint of domestic violence or is otherwise present at the place of an incident of domestic violence or when the incident of domestic violence is reported to him, shall inform the aggrieved person-

(a) of her right to make an application for obtaining a relief by way of a protection order, an order for monetary relief, a custody order, a residence order, a compensation order or more than one such order under this Act;

(b) of the availability of services of service providers;

(c) of the availability of services of the Protection Officers;

(d) of her right to free legal services under the Legal Services Authorities Act, 1987 (39 of 1987);

(e) of her right to file a complaint under section 498A of the Indian Penal Code (45 of 1860), wherever relevant:

Provided that nothing in this Act shall be construed in any manner as to relieve a police officer from his duty to proceed in accordance with law upon receipt of information as to the commission of a cognizable offence.

घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 3 क्या है

मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) की धारा 5  के बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 4 क्या है

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