आईपीसी धारा 366 क्या है | IPC Section 366 in Hindi – विवरण, सजा का प्रावधान


आईपीसी धारा 366 क्या है

अकसर हम अपने आस पास देखते हैं कि हमारे समाज में महिलाओं के प्रति जो सम्मान होना चाहिए अधिकार ऐसा देखने को नहीं मिलता | महिलायें अधिकतर  हर जगह अत्याचार और शोषण का शिकार होती रहती है | इसके बचाव के लिए भारतीये दंड संहिता में कई तरह के प्रावधान देखने को मिलते है | आज हम भारतीय दंड संहिता की उस धारा के बारे में बात करेंगे जिसमे ” विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत या अपहृत करना या उत्प्रेरित करने जैसे अपराधों को शामिल किया गया है |  आज का ये आर्टिकल इसी को ध्यान में रखकर क्रिएट किया गया है | 

आईपीसी धारा 356 क्या है 

उपरोक्त प्रकार के अपराध को भारतीय दंड सहिता (IPC) की धारा 366 में परिभाषित किया गया है | आज आपको हम यहाँ इस पेज पर यही बताएंगे कि इस अपराध के होने पर भारतीय दंड सहिता (IPC) की धारा 366 किस तरह वर्क करती है | यहाँ हम आपको भारतीय दंड संहिता यानि कि IPC की धारा 366 क्या है ? इसके सभी पहलुओं पर विस्तार से यहाँ डिस्कस करेंगे |



इस पोर्टल के माध्यम से आज इस पेज पर धारा 366 में सजा के बारे में क्या प्रावधान बताये जा रहे हैं, और इसमें कितनी सजा देने की बात कही गई है इन सभी टॉपिकों के बारे में विस्तृत चर्चा की जा रही है | साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366 में जमानत के बारे में क्या प्रावधान है ?  सभी बातों पर आज हम विस्तार से यहाँ जानेंगे, साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

आईपीसी धारा 363 क्या है 

IPC (भारतीय दंड संहिता की धारा ) की धारा 366 के अनुसार :-

विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना –

“जो कोई किसी स्त्री का व्यपहरण या अपहरण उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी व्यक्ति से विवाह करने के लिए उस स्त्री को विवश करने के आशय से या वह विवश की जायेगी यह सम्भाव्य जानते हुये अथवा अयुक्त संभोग करने के लिए उस स्त्री को विवश या विलुब्ध करने के लिए या वह स्त्री अयुक्त संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध की जायेगी, यह सम्भाव्य जानते हुये करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से,

जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, और जो कोई किसी स्त्री को किसी अन्य व्यक्ति से अयुक्त सम्भोग करने के लिए विवश या विलुब्ध करने के आशय से या वह विवश या विलुब्ध की जायेगी यह सम्भाव्य जानते हुए इस संहिता में यथापरिभाषित आपराधिक अभित्रास द्वारा अथवा प्राधिकार के दुरुपयोग या विवश करने के अन्य साधन द्वारा उस स्त्री को किसी स्थान से जाने को उत्प्रेरित करेगा, वह भी पूर्वोक्त प्रकार से दण्डित किया जायेगा”।

 S. 366 – “Kidnapping, abducting or inducing woman to compel her marriage, etc.—

“Whoever kidnaps or abducts any woman with intent that she may be compelled, or knowing it to be likely that she will be compelled, to marry any person against her will, or in order that she may be forced or seduced to illicit intercourse, or knowing it to be likely that she will be forced or seduced to illicit intercourse, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine;

1[and whoever, by means of criminal intimidation as defined in this Code or of abuse of authority or any other method of compulsion, induces any woman to go from any place with intent that she may be, or knowing that it is likely that she will be, forced or seduced to illicit intercourse with another person shall be punishable as aforesaid”.

आईपीसी धारा 332 क्या है

लागू अपराध

किसी स्त्री को विवाह के लिए विवश करने, अपवित्र करने के लिए व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना आदि।

सजा10 वर्ष का कारावास साथ में आर्थिक दंड भी दिया जायेगा

यह एक गैरजमानती, संज्ञेय अपराध है और {सेशन कोर्ट } सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

आईपीसी की धारा 366 में सजा (Punishment) क्या होगी

यहाँ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366 में किये गए अपराध के लिए सजा को निर्धारित किया गया हैं | जो इस प्रकार है – विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना”, यह अपराध माना जाता है | इसके लिए उस व्यक्ति को जिसके द्वारा ऐसा किया गया है उसको 10 वर्ष का कारावास साथ में आर्थिक दंड दोनों से दण्डित किया जायेगा | यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध  है और {सेशन कोर्ट } सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

आईपीसी धारा 336 क्या है

आईपीसी (IPC) की धारा 366 में  जमानत  (BAIL) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366 में जिस अपराध की सजा के बारे में बताया गया है उस अपराध को एक गैरजमानती और संज्ञेय अपराध बताया गया है | यहाँ आपको मालूम होना चाहिए कि संज्ञेय अपराध और गैर-जमानतीय होने पर इसमें जमानत मिलने में मुश्किल आती है क्योंकी यह गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध  है साथ ही यह {सेशन कोर्ट} सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होता है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366 के बारे में  इस आर्टिक्ल के माध्यम से पूरी जानकारी हो गई होगी इसमें क्या अपराध बनता है कैसे इस धारा को अप्लाई किया जायेगा  | इस अपराध को कारित करने पर क्या सजा होगी  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, साथ ही इसमें जमानत के क्या प्रावधान होंगे इसकी जानकारी भी दी है | यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है |

आईपीसी धारा 338 क्या है

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना –10 वर्ष का कारावास + आर्थिक दंड भी दिया जायेगासंज्ञेयगैर जमानतीयसत्र न्यायालय {सेशन कोर्ट }

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12 thoughts on “आईपीसी धारा 366 क्या है | IPC Section 366 in Hindi – विवरण, सजा का प्रावधान”

  1. सर जी नमस्ते, मेरा नाम राहुल है ,मेरी नाबालिक बहन जो (१७ साला ५ महीने) की है। उसका फेक पैनकार्ड और आधार कार्ड, बनाकर एक सुनील नाम के लड़के ने उस से शादी कर लिय है। और उस लड़के ने उस लड़की को व्हाट्सप्प पर जान से मरने की धमकी दी (जो की FIR के बाद मैं लड़की के मोबाइल से मिला) (लेकिन उस लड़की ने कहा की उसने मज़ाक मैं कहा दिया होगा) लड़के ने शादी के लिए उस लड़की को मजबूर कर दिया था, एक बार उसको गाड़ी के निचे भी डाला दिया था। और ३ महीने पहले लड़की के माँ बापा को लड़के वाले (सुनील) ने घर मैं घुश कर मर भी CCTV रिकॉडिंग के सामने उसका एक FIR भी हुआ है (IPC-452, 232, 504, 506) के अंतरगर् दर्ज हुआ है । पर अभी लड़की अपने माँ बापा के घर नहीं आना चाहती है। लड़की का कहना है लड़का बहुत ही डेंजर है। और इस समय लड़की को CWC मैं लास्ट दो महीने से रखे है। अभी उसे १८ पूरा होने मैं ३ महीने का समय है। जो अभी दूसरा FIR हुआ है उस में (IPC -३६६, 366A) लगा है। लड़के को भी पुलिस ने FIR होने के एक महीने बाद मैं जेल मैं डाला दिया है। लड़के के माँ बापा अभी पुरे समाज के अंदर यहाँ कहा रहे है की लड़की १८ साला पूरा होने के बाद, फिर से उससे शादी कर लेंगे। जब वह CWC से बहार आ जाएगी। और बोलते है की सुनील (उहा लड़का) जेल से बहार आने के बाद तुम लोगो को छोड़गा नही। और तुम्हरे पुरे परिवार को तबाह कर देगा। सर जी वह लड़का सुनील बहुत ही हरामी है। सर जी लड़की उस के खिलाफ कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। लड़के वाले लड़की के सामने अच्छा बनने का दिखवा करते है और हम लोगो को धमकी देते है। सर जी हम लोग किस तरह से यहाँ शादी रोक सकते है। जिस से उस लड़की की लाइफ बच जाया। सर एक बार पढ़ा कर रिप्लाई जरूर दे। नमस्कार!

    FIR 1st: 1/06/2020 (IPC-452, 232, 504, 506)
    FIR 2nd: 15/09/2020 (IPC-363, 366A)

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  2. Agar balig ladki apne parents ko bina bataye nabalig Larke ke sath Larke ke ghar chali jay. Larki ke parents jab Larke ke ristedar ka ghar pata lagakar waha pahucha to Larke ke tasveer ko pahchanne se inkar kar diya. Jab Larke ke dost ko dhamkaya gaya tab sahi pata mila. ladki ke parents waha gaya aur un dono se bat ki, ladki ladke dono shadi karna chahti hai.kya balig ladki aur nabalig Ladka kanoonan shadi kar sakta hai, ladki ke parents ke khilaf ?
    Ladke ka age 20 year aur ladki ka 18 year.

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  3. Namaste sir ek question thi Aap se
    Meri ek chhoti bahan h wo kisi ladke
    Ke sath chali gai thi khud ke marzi se
    Bina parents ko btaye huye uska age 18th
    Ho raha h mere ghar wale uska kahi aur sadi kar rahe the is wajah se wo chali gai aur jiss ladke ke sath gai h wo bhi 18th age ka hi h to us ladke pe koi case ho sakta h lekin meri bahan pure support se ladke ke sath h aur ghar bhi nhi aana chahti h

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  4. 366 363 120 बी के तहत हमें गलत फसाया गया है मुकदमा करता हमारा नाम निकालना चाहता है वह कैसे निकालेगा हमारा नाम हम इस तरह से बच जाएंगे कि नहीं प्लीज मेरी सहायता करें नमस्कार सर जी

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