सीआरपीसी की धारा 24 क्या है | Section 24 CRPC in Hindi


सीआरपीसी की धारा 24 क्या है

दंड प्रक्रिया सहिता में लोक अभियोजक का प्रावधान सीआरपीसी (CrPC) की धारा 24 में  किया गया है | यहाँ हम आपको ये बताने का प्रयास करेंगे कि दंड प्रक्रिया सहिता (CrPC) की धारा 24 के लिए किस तरह अप्लाई होगी | दंड प्रक्रिया सहिता यानि कि CrPC की धारा 24 क्या है ? इसके सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से यहाँ समझने का प्रयास करेंगे | आशा है हमारी टीम द्वारा किया गया प्रयास आपको पसंद आ रहा होगा |

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(CrPC Section 24) Dand Prakriya Sanhita Dhara 24 (लोक अभियोजक) 

इस पेज पर दंड प्रक्रिया सहिता की धारा 24 लोक अभियोजक के बारे में क्या प्रावधान बताये गए हैं ? इनके बारे में पूर्ण रूप से इस धारा में चर्चा की गई है | साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 24 कब नहीं लागू होगी ये भी बताया गया है ? इसको भी यहाँ जानेंगे, साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की अन्य महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी  ले सकते हैं |



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सीआरपीसी की धारा 24 लोक अभियोजक क्या है

CrPC (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ) की धारा 24 के अनुसार :-

लोक अभियोजक–

(1) प्रत्येक उच्च न्यायालय के लिए, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार उस उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात्, यथास्थिति, केंद्रीय या राज्य सरकार की ओर से उस उच्च न्यायालय में किसी अभियोजन, अपील या अन्य कार्यवाही के संचालन के लिए एक लोक अभियोजक नियुक्त करेगी और एक या अधिक अपर लोक अभियोजक नियुक्त कर सकती है।

(2) केंद्रीय सरकार किसी जिले या स्थानीय क्षेत्र में किसी मामले या किसी वर्ग के मामलों के संचालन के प्रयोजनों के लिए एक या अधिक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकती है।

(3) प्रत्येक जिले के लिए, राज्य सरकार एक लोक अभियोजक नियुक्त करेगी और जिले के लिए एक या अधिक अपर लोक अभियोजक भी नियुक्त कर सकती है :

परंतु एक जिले के लिए नियुक्त लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक किसी अन्य जिले के लिए भी, यथास्थिति, लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक नियुक्त किया जा सकता है।

(4) जिला मजिस्ट्रेट. सेशन न्यायाधीश के परामर्श से. ऐसे व्यक्तियों के नामों का एक पैनल तैयार करेगा जो, उसकी राय में, उस जिले के लिए लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक नियुक्त किए जाने के योग्य है।

(5) कोई व्यक्ति राज्य सरकार द्वारा उस जिले के लिए लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक नियुक्त नहीं किया जाएगा जब तक कि उसका नाम उपधारा (4) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट द्वारा तैयार किए गए नामों के पैनल में न हो।

(6) उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी राज्य में अभियोजन अधिकारियों का नियमित काडर है वहां राज्य सरकार ऐसा काडर, गठित करने वाले व्यक्तियों में से ही लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक नियुक्त करेगी:

परंतु जहां राज्य सरकार की राय में ऐसे काडर में से कोई उपयुक्त व्यक्ति नियुक्ति के लिए उपलब्ध नहीं है वहाँ राज्य सरकार उपधारा (4) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट द्वारा तैयार किए गए नामों के पैनल में से, यथास्थिति, लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक के रूप में किसी व्यक्ति को नियुक्त कर सकती है।

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स्पष्टीकरण – इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए.

(क) “अभियोजन अधिकारियों का नियमित काडर से अभियोजन अधिकारियों का वह काडर अभिप्रेत है, जिसमें लोक अभियोजक का, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, पद सम्मिलित है और जिसमें उस पद पर सहायक लोक अभियोजक की, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, पदोन्नति के लिए उपबंध किया गया है।

(ख) “अभियोजन अधिकारी से लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक के कृत्यों का पालन करने के लिए इस संहिता के अधीन नियुक्त किया गया व्यक्ति अभिप्रेत है, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो।]

(7) कोई व्यक्ति उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (6) के अधीन लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक नियुक्त किए जाने का पात्र तभी होगा जब वह कम से कम सात वर्ष तक अधिववक्ता के रूप में विधि व्यवसाय करता रहा हो।

(8) केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार किसी मामले या किसी वर्ग के मामलों के प्रयोजनों के लिए किसी अधिवक्ता को, जो कम से कम दस वर्ष तक विधि व्यवसाय करता रहा हो, विशेष लोक अभियोजक नियुक्त कर सकती है :

[परंतु न्यायालय इस उपधारा के अधीन पीड़ित को, अभियोजन की सहायता करने के लिए अपनी पसंद का अधिवक्ता रखने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा।]

(9) उपधारा (7) और उपधारा (8) के प्रयोजनों के लिए उस अवधि के बारे में, जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने प्लीडर के रूप में विधि व्यवसाय किया है या लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक या अन्य अभियोजन अधिकारी के रूप में, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, सेवाएं की हैं (चाहे इस संहिता के प्रारंभ के पहले की गई हों या पश्चात्) यह समझा जाएगा कि वह ऐसी अवधि है जिसके दौरान ऐसे व्यक्ति ने अधिवक्ता के रूप में विधि व्यवसाय किया है।

According to Section. 24 –    “ Public Prosecutors  ”–

 (1) For every High Court, the Central Government or the State Government shall, after consultation with the High Court, appoint a Public Prosecutor and may also appoint one or more Additional Public Prosecutors, for conducting in such Court, any prosecution, appeal or other proceeding on behalf of the Central Government or State Government, as the case may be.

(2) The Central Government may appoint one or more Public Prosecutors for the purpose of conducting any case or class of cases in any district or local area.

(3) For every district, the State Government shall appoint a Public Prosecutor and may also appoint one or more Additional Public Prosecutors for the district:

Provided that the Public Prosecutor or Additional Public Prosecutor appointed for one district may be appointed also to be a Public Prosecutor or an Additional Public Prosecutor, as the case may be, for another district.

(4) The District Magistrate shall, in consultation with the Sessions Judge, prepare a panel of names of persons, who are, in his opinion fit to be appointed as Public Prosecutors or Additional Public Prosecutors for the district.

(5) No person shall be appointed by the State Government as the Public Prosecutor or Additional Public Prosecutor for the district unless his name appears in the panel of names prepared by the District Magistrate under sub- section (4).

(6) Notwithstanding anything contained in sub- section (5), where in a State there exists a regular Cadre of Prosecuting Officers, the State Government shall appoint a Public Prosecutor or an Additional Public Prosecutor only from among the persons constituting such Cadre:

Provided that where, in the opinion of the State Government, no suitable person is available in such Cadre for such appointment that Government may appoint a person as Public Prosecutor or Additional Public Prosecutor, as the case may be, from the panel of names prepared by the District Magistrate under sub- section (4).

(7) A person shall be eligible to be appointed as a Public Prosecutor or an Additional Public Prosecutor under sub- section (1) or sub- section (2) or sub- section (3) or sub- section (6), only if he has been in practice as an advocate for not less than seven years.

(8) The Central Government or the State Government may appoint, for the purposes of any case or class of cases, a person who has been in practice as an advocate for not less than ten years as a Special Public Prosecutor.

(9) For the purposes of sub- section (7) and sub- section (8), the period during which a person has been in practice as a pleader, or has rendered (whether before or after the commencement of this Code) service as a Public Prosecutor or as an Additional Public Prosecutor or Assistant Public Prosecutor or other Prosecuting Officer, by whatever name called, shall be deemed to be the period during which such person has been in practice as an advocate.

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आपको आज दंड प्रक्रिया संहिता  की धारा 24 लोक अभियोजक के  बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है |

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