Court Marriage (कोर्ट मैरिज) Process | Online Registration Fees


कोर्ट मैरिज का जब भी आप नाम सुनते होंगे तो अक्सर यही सवाल आपके मन में आता होगा कि आखिर ये कोर्ट मैरिज होती कैसे है क्योंकि जिस शादियों में हम अक्सर जाते हैं वो खूब शोर- शराबे वाली होती है | परन्तु कोर्ट मैरिज वाले केस में ऐसा कम ही होता है | आज के इस आर्टिकल में हम आपसे यही चर्चा करेंगे कि क्या है कोर्ट मैरिज ? Court Marriage (कोर्ट मैरिज) का Process क्या होता है ? इसके लिए Online Registration कैसे होगा और इसके (Rules) रूल्स क्या होंगे ? इन्ही सब बातो को आज हम देखेंगे |

इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ Court Marriage (कोर्ट मैरिज) Process | Online Registration Fees | Rules in Hindi के बारे में पूर्ण रूप से बात होगी | साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य कानूनी प्रक्रिया की महत्वपूर्ण बातों के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

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क्या है (Court Marriage) कोर्ट मैरिज?

कोर्ट मैरिज की जब हम बात करते हैं तो ये आमतौर पर होने वाली शादियों से बिलकुल अलग होती है। इसे किसी परंपरागत समारोह के बिना ही कोर्ट में मैरिज ऑफिसर के सामने संपन्न किया जाता  है। विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत ही सभी कोर्ट मैरिज की जाती हैं। कोर्ट मैरिज किसी भी धर्म संप्रदाय अथवा जाति के बालिग युवक-युवती के बीच हो सकती है। यहाँ आपको बता दें कि किसी विदेशी व भारतीय की भी कोर्ट मैरिज हो सकती है। कोर्ट मैरिज करने के लिए मैरिज रजिस्ट्रार के समक्ष आवेदन करना होता है।

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कोर्ट मैरिज के लिए प्रक्रिया Court Marriage Process

अगर हम कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया के बारे में बात करते हैं तो ये पूरे भारत में समान ही है। इसे विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अंतर्गत शासित किया जाता है। इस अधिनियम के द्वारा विभिन्न धर्म के स्त्री पुरुष नागरिक समारोह में विवाह सम्पन्न कर सकते है। कोर्ट मैरिज के अंतर्गत न केवल हिंदू का ही बल्कि मुस्लिम, ईसाई, सिख, जैन और बौद्धों का भी विवाह शामिल होता हैं। कोर्ट मैरिज किसी भी धर्म, संप्रदाय, या जाति के युवक -युवती के बीच हो सकती है। लेकिन इसके लिए प्रमुख शर्त यह है कि दोनों को बालिग होना चाहिए। आपको हमने पहले ही बताया है कि किसी विदेशी और भारतीय की भी कोर्ट मैरिज हो सकती है।

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कोर्ट मैरिज के लिए शर्तें (Conditions for Court Marriage)

  • पूर्व में कोई विवाह ना हुआ हो यह  नियम बताता है कि इस कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले दोनों पक्ष यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका कोई भी पूर्व विवाह तो नहीं हुआ है अगर हुआ है तो वह वैध ना हो। दूसरी बात दोनों पक्षों की पहली शादी से जुड़े पति या पत्नी जीवित ना हों।
  • लीगली रेडी इसका अर्थ है कि आपसी रिश्तेदारी में शादी नहीं हो सकती है। यानि बुआ, बहन आदि। यह नियम केवल हिन्दुओं पर लागू है। मैरिज के समय दोनों ही पक्ष यानि वर व वधू अपनी वैध सहमति यानि ‘लीगली रेडी’ देने के लिए सक्षम होने चाहिए। सक्षम का अर्थ है कि प्रक्रिया में स्वेच्छा से शामिल होना।
  • उम्र बहुत मायने रखती है, कोर्ट मैरिज के लिए पुरुष की आयु 21 वर्ष से ज्यादा तथा महिला की उम्र 18 वर्ष से ज्यादा होना बहुत अनिवार्य है। साथ ही दोनों ही मानसिक रूप से स्टेबल यानि स्वस्थ होने चाहिए।

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कोर्ट मैरिज प्रक्रिया के चरण

  1. विवाह के लिए विवाह की सूचना का आवेदन – इसके लिए कोर्ट में सर्वप्रथम जिले के विवाह अधिकारी को सूचित करना होगा |
  2. जिसकी सूचना विवाह में शामिल होने वाले पक्षों द्वारा लिखित रूप में दी जाएगी।
  3. कोर्ट मैरिज की सूचना उस जिले के विवाह अधिकारी को दी जाएगी। सूचना के स्वरूप के तहत आयु और निवास स्थान यानि रेजिडेंस के प्रमाण पात्र संलग्न करने  होंगे।
  4. सूचना का प्रकाशित होना :  जिले के विवाह अधिकारी, जिनके सामने सूचना जारी की गई थी, वो सूचना को प्रकाशित करेंगे। सूचना की एक प्रति कार्यालय में एक विशिष्ट स्थान पर तथा एक प्रति उस जिला कार्यालय में जहां विवाह पक्ष स्थाई रूप से निवासी हैं, प्रकाशित की जाएगी।
  5. विवाह में आपत्ति का दर्ज होना : कोई भी व्यक्ति इसे दर्ज करा सकता है इसका अर्थ है कोई भी व्यक्ति विवाह में आपत्ति दर्ज करा सकता है, जिसका लड़का या लड़की से दूर या पास का रिश्ता हो। यदि दी गई आपत्तियों का कोई आधार होगा  तो ही उन पर जांच कराई जाएगी। ये आपत्ति संबंधित जिले के विवाह अधिकारी के सामने दर्ज होती है ।

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  1. आपत्ति होने पर : आपत्ति किए जाने के 30 दिन के भीतर विवाह अधिकारी को जांच-पड़ताल करना होता है। यदि की गई आपत्तियों को सही पाया जाता है, तो विवाह संपन्न नहीं हो होगा। 
  2. आपत्तियों  पर कोई भी पक्ष अपील दर्ज कर सकता है। अपील आपके स्थानीय जिला न्यायालय में विवाह अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में दर्ज की जा सकती है। और यह आपत्ति के स्वीकार होने के 30 दिन के भीतर ही दर्ज की जा सकती है।
  3. इसके बाद विवाह अधिकारी की उपस्थिति में दोनों पक्ष और तीन गवाह, घोषणा पर हस्ताक्षर करते हैं। विवाह अधिकारी के हस्ताक्षर भी होते हैं। इस घोषणा का लेख और प्रारूप अधिनियम की अनुसूची 111 के अनुसार होगा ।
  4. विवाह का प्रमाण पत्र – अब अंत में विवाह अधिकारी विवाह होने के उपरांत मैरिज सर्टिफिकेट पत्र पुस्तिका में एक प्रमाण पत्र दर्ज करेगा । दोनों पक्षों और तीन गवाहों द्वारा हस्ताक्षर करने पर एक सर्टिफिकेट कोर्ट मैरिज का निर्णायक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है |

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क्या कोर्ट मैरिज करने पर पैसे मिलते हैं?

कोर्ट मैरिज करने पर यहाँ यदि कोई दलित से अंतर जातीय विवाह करता है, तो उस नवदंपति को सरकार ढाई लाख रुपए देती है। नव दंपति में से कोई एक दलित समुदाय से होना चाहिए, जबकि दूसरा दलित समुदाय से बाहर का। यह आर्थिक मदद डॉ अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज के तहत दी जाती है। शादी को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत रजिस्टर होना चाहिए। इस संबंध में नवदंपति को एक एफिडेविट (Affidavit) देना होगा ।

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कोर्ट मैरिज के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • आवेदन पत्र और अनिवार्य शुल्क |
  • दूल्हा-दुल्हन के पासपोर्ट साइज के 4 फोटोग्राफ |
  • पहचान प्रमाण पत्र (आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी) |
  • कोर्ट मैरिज के लिए हर राज्य की फीस अलग होती है, लेकिन इसका शुरुआत शुल्क 500 से 1000 रुपये होता है |
  • 10TH /12TH  की मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र |
  • शपथ पत्र जिससे ये साबित हो कि दूल्हा-दुल्हन में कोई भी किसी अवैध रिश्ते में नहीं है।
  • गवाहों की फोटो व पैन कार्ड (PAN CARD) |
  • अगर तलाक़शुदा है तो तलाक के पेपर, या फिर पूर्व पति-पत्नी मृत हैं तो उनका डेथ सर्टिफिकेट |

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कोर्ट मैरिज के बाद तलाक की प्रक्रिया

यहाँ आपको ध्यान देना होगा कि कोर्ट मैरिज करने के बाद आप एक साल तक तलाक नहीं ले सकते। इसका अर्थ है विवाह का कोई भी पक्ष 1 वर्ष की समय सीमा समाप्त होने से पहले तलाक हेतु न्यायालय में याचिका दायर नहीं कर सकता। लेकिन, कुछ विशेष परिस्थितियों में जहां माननीय न्यायालय को ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता द्वारा असाधारण कठिनाइयों का सामना किया जा रहा है, ऐसे मामलों में तलाक की याचिका दी जा सकती है।

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मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता कहाँ होती है

आज कल मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता लगभग हर जगह होती है जैसे पासपोर्ट अप्लाई करने के लिए, नया बैंक अकाउंट खोलने के लिए, वीजा अप्लाई करने के लिए। शादी के बाद विदेश में सेटल होने के लिए भी शादी का रजिस्ट्रेशन और उसका सर्टिफिकेट जरूरी होता है।

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उपरोक्त वर्णन से आपको आज Court Marriage (कोर्ट मैरिज) Process | Online Registration Fees | Rules in Hindi इसके बारे में जानकारी हो गई होगी | Court Marriage (कोर्ट मैरिज) Process | Online Registration Fees | Rules  इसके बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इससे सम्बन्धित या अन्य किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट  बॉक्स  के  माध्यम  से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

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7 thoughts on “Court Marriage (कोर्ट मैरिज) Process | Online Registration Fees”

  1. अगर लड़का लड़की शादी करने के लिए इच्छुक हैं और अगर माता पिता शादी के विरुद्ध हैं तों क्या कोर्ट शादी करा सकतीं हैं

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  2. Namashkar!!!
    Bharat ki Kanoon vayvashtha se me bilkul sahmat hu lekin Abhi ek bahut badi Vidambhna chal rhi h. Bhartiya kanoon ke sahaare wo yeh h ki ladke-ladki bhag kar ghar walo ki ichcha ke virudh vivah kar rhe h jo pahle se shadi-sudha h.
    Ek garib Maa-Baap ke ye Bachche Nadani kar dete h or unhe ye pta hi nhi hota h ki wo kya kar rhe h.
    Maa-Baap bechare or garib hote jate h karza karte h or aage wale samandhi ka pura kharcha dete h.

    Me jyada nhi balki itni si guzaarish karta hu ki bhartiya kanoon me itna fer-badal karwa dijiye ki court me Maa-baap ki manjuri hona aavashyak ho. Dono paksho ke Maa-baap ke sertificate per sign ho tabhi court vivah sampann kiya jave.

    Prem Dewasi.

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