संविधान क्या होता है | Indian Constitution in Hindi | संविधान की परिभाषा क्या है


किसी भी देश का संविधान उस देश की राजनीतिक व्यवस्था, न्याय व्यवस्था तथा नागरिकों के हितों की रक्षा करने का एक मूल माध्यम होता है| जिसके माध्यम से उस देश के विकास की दिशा का निर्धारण होता है| संविधान, किसी भी देश का मौलिक कानून है, जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और मुख्य कार्य का निर्धारण करता है।

इसके साथ ही यह सरकार और देश के नागरिकों के बीच संबंध भी स्थापित करता है। भारत का संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को आंशिक रूप से लागू किया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे पूर्ण रूप से पूरे देश में लागू कर दिया गया था| संविधान क्या होता है, संविधान की परिभाषा के बारें में आपको यहाँ विस्तार से जानकारी दे रहे है |

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संविधान की परिभाषा | Definition of Indian Constitution in Hindi

संविधान शब्द सम और विधान दो शब्दों से मिलकर बना है| सम का अर्थ बराबर और विधान का अर्थ नियम कौर कानून होता है, अर्थात वह नियम जो सभी नागरिको पर एक सामान लागू होता है, संविधान कहलाता है| संविधान को इंग्लिश में Constitution कहते है| संविधान किसी देश की नीतियों और सिद्धांतो का वह संग्रह होता है, जिसके आधार पर उस देश की शासन व्यवस्था को संचालित किया जाता है|          

भारत का संविधान सभा द्वारा 26 जनवरी 1950 को आंशिक रूप से संपूर्ण देश में लागू कर दिया गया था| संविधान दो प्रकार के होते हैं, एक लिखित संविधान और दूसरा अलिखित| विश्व का प्रथम लिखित संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका का है, और संसार का सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत का है| वर्तमान में, भारत का संविधान 465 अनुच्छेद जो 25 भागों और 12 अनुसूचीयों में लिखित है| जिस समय संविधान लागू हुआ था, उस समय 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूची और 22 भाग थे। संविधान में समय– समय पर कई संशोधन किए जाते हैं|

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लिखित संविधान क्या होता है (Written Constitution in Hindi)

लिखित संविधान वह होता है, जिसका अधिकांश भाग लिखित होता है। लिखित संविधान किसी देश को अच्छी तरह से संचालित करनें के लिए बनाया गया लिखित दस्तावेज होता है| लिखित संविधान का निर्माण किसी विशेष समय पर संविधान सभा द्वारा किया जाता है। लिखित संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है, इसका उल्लंघन करनें वाले को गैर संवैधानिक माना जाता है। संविधान के नियमों के आधार पर सम्पूर्ण देश में शासन किया जाता है|

अलिखित संविधान क्या है (Unwritten Constitution)

अलिखित संविधान का आशय ऐसे संविधान से है, जिसे लेखबद्ध ना किया गया हो अर्थात वह संविधान लिखित रूप से मौजूद ना हो। अलिखित संविधान के कुछ भाग लिखित रूप से मौजूद होते हैं परंतु सभी भाग नहीं। मुख्यतः संविधान लिखित रूप में ही मौजूद होते हैं। ब्रिटेन ही एक ऐसा देश है, जिसका संविधान अलिखित है और उस संविधान के केवल कुछ ही भाग लिखित रूप से मौजूद हैं। ब्रिटिश का संविधान अलिखित होने का कारण यहाँ का संविधान का निरंतर बदलता रहता है।

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भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं (Characteristics of Indian Constitution)

प्रत्येक देश के संविधान की अपनी विशेषताएं होती है, जिनकी सहायता से उस देश की सम्पूर्ण व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। यही बात भारत के संविधान के बारे में कही जा सकती है| भारतीय संविधान का निर्माण एक विशेष संविधान सभा के द्वारा किया गया है, और इस संविधान की अधिकांश बातें लिखित रूप में है। इस दृष्टिकोण से भारतीय संविधान, अमेरिकी संविधान के समतुल्य है। भारत का संविधान लिखनें में 2 वर्ष 11 महीनें 18 दिन का समय लगा था| भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, और इसकी अनेक विशेषताएं है, जिसके कारण यह अन्य देशों से भिन्न है| संविधान की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है-

1.सबसे बड़ा लिखित संविधान

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है| वर्तमान में इस संविधान में कुल 450 अनुच्छेद (24 भागों में विभक्त) तथा 12 अनुसूचियां, एक प्रस्तावना तथा 5 परिशिष्ट हैं| भारतीय संविधान में कुल 177369 शब्द शामिल हैं| भारतीय संविधान की विशालता का मुख्य कारण उसका विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र (लगभग 32,87,263 वर्ग किलोमीटर), केंद्र तथा राज्यों के लिए एक ही संविधान जातिगत एवं भाषागत विशेषताएं (लगभग 2000 जातियां एवं 45,000 उपजातियां तथा 1652 भाषाएं) तथा संविधान सभा में वकीलों की अधिक संख्या एवं प्रभाव का होना है |

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2.लचीलेपन और कठोरता का समन्वय    

 भारतीय संविधान लचीलेपन और कठोरता का समावेश है, यह अमेरिका, फ्रांस, जापान और स्विट्जरलैंड की तरह ना तो बहुत कठोर है और ना ही ब्रिटेन व इजरायल की तरह बहुत लचीला है| भारतीय संविधान लचीलेपन और कठोरता का विचित्र मिश्रण है| भारत के संविधान में राष्ट्रपति का चुनाव (अनुच्छेद 54 और 55) संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति (अनुच्छेद 73 और 162) तथा संविधान संशोधन की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) अनम्यता के गुण को प्रदर्शित करते हैं, वही नए राज्यों का निर्माण तथा उसकी सीमाओं में परिवर्तन तथा नागरिकता जैसे प्रावधानों का संशोधन, जो साधारण बहुमत के द्वारा हो जाते हैं| अमेरिका के संविधान में पिछले 225 वर्ष में मात्र 27 संशोधन तथा ऑस्ट्रेलिया के संविधान में 110 वर्षो में 8 संशोधन किए गए हैं वहीं भारत के संविधान में 2017 तक 122 संविधान संशोधन हो चुके हैं|

3.एकीकृत और स्वतंत्र न्यापालिका

भारत का संविधान एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका प्रणाली प्रदान करता है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट है। इसे भारत के सभी न्यायालयों पर अधिकार प्राप्त है। इसके बाद उच्च न्यायालय, जिला अदालत और निचली अदालत का स्थान है। किसी भी प्रकार के प्रभाव से न्यायपालिका की रक्षा के लिए संविधान में कुछ प्रावधान बनाए गए हैं |

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4.विभिन्न स्रोतों से निर्मित संविधान

भारतीय संविधान के निर्माण में देश और विदेशी स्त्रोत लिए गया हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है| भारतीय संविधान के निर्माण में लगभग 250 अनुच्छेदों को भारत सरकार अधिनियम 1935 से लिया गया है| इसके अतिरिक्त 60 विश्व के संविधान के प्रावधानों को भी इसमें शामिल किया गया है |

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5.धर्मनिरपेक्ष देश

धर्मनिरपेक्ष देश शब्द का अर्थ यह है, कि भारत में मौजूद सभी धर्मों को देश में एक समान संरक्षण और समर्थन मिलेगा। इसके अतिरिक्त सरकार सभी धर्मों के साथ एक जैसा व्यवहार करेगी और उन्हें एक समान अवसर उपलब्ध कराएगी।

6.मौलिक कर्तव्य

मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) के अंतर्गत संविधान में शामिल किया गया है। इसके लिए एक नया भाग IV– ए बनाया गया और अनुच्छेद 51– ए के अंतर्गत दस कर्तव्य शामिल किए गए। यह प्रावधान नागरिकों यह बात बताता है, कि अधिकारों का उपयोग करने के दौरान उन्हें अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करना चाहिए।

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7.सरकार का संसदीय स्वरूप 

संविधान के अनुसार भारत में सरकार का संसदीय स्वरूप है। भारत में दो सदनों लोकसभा और राज्य सभा, वाली विधायिका है। सरकार के संसदीय स्वरूप में, विधायी और कार्यकारिणी अंगों की शक्तियों में कोई स्पष्ट अंतर नहीं है। भारत में सरकार का मुखिया प्रधानमंत्री होता है।

8.एकल नागरिकता

ब्रिटेन, फ्रांस, चीन आदि देशों की तरह भारतीय संविधान में भारतीयों के लिए एकल नागरिकता का प्रावधान करता है| विश्व के  लगभग 90 देशों में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है, जिसमें व्यक्ति एक ही साथ दो देशों की नागरिकता रख सकता है| दिसंबर 2005 से अप्रवासी भारतीयों तथा भारतीय मूल के व्यक्तियों को दी जानेवाली समुंद्र पारी नागरिकता किसी भी प्रकार से दोहरी नागरिकता नहीं है, क्योंकि समुंद्र पारी नागरिकता प्राप्त व्यक्ति को भारत में किसी भी प्रकार का राजनीतिक तथा सार्वजनिक पदों को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान नहीं किया गया है |

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9.सार्वभौम व्यस्क मताधिकार 

भारत में निवास करनें वाले 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को जाति, धर्म, वंश, लिंग, साक्षरता आदि के आधार पर बिना भेदभाव किए मतदान करनें का अधिकार प्राप्त है। सार्वभौम व्यस्क मताधिकार सामाजिक असमानताओं को दूर करता है और सभी नागरिकों के लिए राजनीतिक समानता के सिद्धांत को बनाए रखता है।

10.आपातकाल के प्रावधान

देश में किसी भी असाधारण स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति को कुछ खास कदम उठाने के अधिकार दिए गये है। आपातकाल लगा दिए जाने के बाद राज्य पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन हो जाते हैं। आवश्यकता के अनुसार आपातकाल देश के कुछ राज्यों या पूरे देश में लगाया जा सकता है।

भारतीय संविधान की अनुसूचियां

भारतीय संविधान में मूल रूप से 8 अनुसूचियां थीं। बाद में, बढ़कर कुल 25 हो गयी गईं। अनुसूचियां सारणी में दी गयी हैं:

भारतीय संविधान अनुसूचियां 1 से 12
पहली अनुसूची – राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और उनके प्रदेशों की सूची
द्वितीय अनुसूची – राष्ट्रपति, राज्यपालों, राज्यों के अध्यक्ष, अध्यक्ष और लोक सभा के उपाध्यक्ष और राज्यों की परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष और विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष और अध्यक्ष किसी राज्य के विधान परिषद के उपाध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय और भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों और उनके क्षेत्रों की सूची।
तीसरी अनुसूची – शपथ का प्रारूप।
चौथी अनुसूची – राज्यों की परिषद में सीटों के आवंटन का प्रावधान।
पांचवीं अनुसूची – अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण का प्रावधान।
छठी अनुसूची – असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के प्रावधान।
सातवीं अनुसूची – संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।
आठवीं अनुसूची – मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची।
नौवीं अनुसूची – कुछ अधिनियमों और विनियमों के सत्यापन के प्रावधान।
दसवीं अनुसूची – दलबदल के आधार पर अयोग्यता के प्रावधान।
ग्यारहवीं अनुसूची – पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व।
बारहवीं अनुसूची – नगर पालिकाओं की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व।

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधन

1950 में संविधान की स्थापना के बाद से अब तक कुल 104 संशोधन हुए हैं।

संशोधनविवरण
पहला संशोधन अधिनियम, 1951संविधान के मौलिक अधिकारों के प्रावधानों में बदलाव
दूसरा संशोधन अधिनियम 1952एक सदस्य को लोकसभा के लिए चुने जाने के लिए 7,50,000 की निर्धारित सीमा को हटाने के लिए संशोधित अनुच्छेद 81।
तीसरा संशोधन अधिनियम, 1954सातवीं अनुसूची में तीन विधान सूचियों में परिवर्तन और समवर्ती सूची में प्रविष्टि 33 को एक नए द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
चौथा संशोधन अधिनियम, 1955अनुच्छेद 31 और 31A में संशोधन किया गया
5वां संशोधन अधिनियम, 1955अनुच्छेद 3 में संशोधन किया गया
7वां संशोधन अधिनियम,1956यह संशोधन राज्य पुनर्गठन अधिनियम को लागू करने के लिए बनाया गया था
9वां संशोधन अधिनियम, 1960इसने भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौते के तहत भारत के कुछ क्षेत्रों को पाकिस्तान को हस्तांतरित करने का प्रावधान किया
10वां संशोधन अधिनियम, 1961दसवां संशोधन भारत के संघ के साथ मुक्त दादरा और नगर हवेली के क्षेत्रों को एकीकृत करता है
11वां संशोधन अधिनियम, 1962निर्वाचक मंडल द्वारा उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा होता है, बजाय संसद के संयुक्त बैठक द्वारा चुनाव के।
21वां संशोधन अधिनियम, 1962गोवा, दमन और दीव के क्षेत्रों को भारतीय संघ में शामिल किया।
13 वां संशोधन अधिनियम, 1962,नागालैंड को भारत संघ के राज्य के रूप में बनाया।
15 वां संशोधन अधिनियम, 1963उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 और अन्य छोटे संशोधन
21वां संशोधन अधिनियम, 1967आठवीं अनुसूची में सिंधी 15 वीं क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल हुई
26 वां संशोधन अधिनियम, 1971रियासतों के पूर्व शासकों की उपाधियों और विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया।
31वां संशोधन अधिनियम, 1973लोकसभा की वैकल्पिक शक्ति को 525 से बढ़ाकर 545 कर दिया।
36वां संशोधन अधिनियम, 1975,सिक्किम को भारतीय संघ का राज्य बनाया।
38वां संशोधन अधिनियम, 1975,राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर सकता है
42वां संशोधन अधिनियम, 1976,संसद के लिए सर्वोच्चता और मौलिक अधिकारों के लिए निर्देशक सिद्धांतों को प्रधानता दी।इसने संविधान में 10 मौलिक कर्तव्यों को भी जोड़ा।संविधान की प्रस्तावना से “सॉवरेन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक” को बदलकर “सॉवरेन सोशलिस्ट सेक्युलर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक’ करना और राष्ट्र की एकता को बढ़ाना
44वां संशोधन अधिनियम, 1978लोकसभा और विधानसभाओं की सामान्य अवधि को 5 साल के लिए बहाल किया।संपत्ति का अधिकार भाग III से हटा दिया गया
45वां संशोधन अधिनियम, 1980,10 वर्ष के लिए (1990 तक) SC/ST आरक्षण का विस्तार।
52वां संशोधन अधिनियम, 1985,दलबदल के आधार पर अयोग्यता के प्रावधानों के संबंध में संविधान में दसवीं अनुसूची सम्मिलित की गई।
56वां संशोधन अधिनियम, 1987भारत के संविधान के हिंद संस्करण को उन सभी उद्देश्यों के लिए स्वीकार किया गया था, जो गोवा के केंद्र शासित प्रदेश में दिए गए थे।
61वां संशोधन अधिनियम, 1989लोकसभा और विधानसभाओं के लिए मतदान की आयु को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया
73वां संशोधन, 1993
(नगरपालिका बिल), 1992
(पंचायत बिल)
 गाँवों में ग्राम सभा, गाँव और अन्य स्तरों पर पंचायतों का गठन, पंचायतों की सभी सीटों पर सीधा चुनाव और एससी और एसटी के लिए सीटों का आरक्षण और पंचायतों के लिए 5 साल का कार्यकाल तय करना।
74वां संशोधन, 1993
(नगरपालिका बिल)
 एससी / एसटी, महिलाओं और ओबीसी के लिए तीन प्रकार की नगरपालिकाओं के संविधान और हर नगरपालिका में सीटों का आरक्षण
86वां संशोधन अधिनियम, 2002अनुच्छेद 21 के बाद नए अनुच्छेद 21 A के सम्मिलन से संबंधित है।नया अनुच्छेद 21A शिक्षा के अधिकार से संबंधित है।
89वां संशोधन अधिनियम, 2003,अनुच्छेद 338 का संशोधन
91वां संशोधन अधिनियम, 2003अनुच्छेद 75 का संशोधन
92वां संशोधन अधिनियम, 2004,आधिकारिक भाषाओं के रूप में बोडो, डोगरी, संताली और मैथली शामिल हुआ।
93वां संशोधन अधिनियम, 2006,सरकार के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण (27%)।
99वां संशोधन अधिनियम, 2015एक राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग का गठन
100वां संशोधन अधिनियम, 2015संविधान (100 वां संशोधन) अधिनियम, 2015, मई 2015 के चौथे सप्ताह में खबरों में था, क्योंकि भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संविधान (119 वां संशोधन) विधेयक, 2013 को स्वीकृति प्रदान की थी जो भारत और बांग्लादेश के बीच के भूमि संबंधी समझौते (LBA) से संबंधित था।
101वां संशोधन अधिनियम, 2017,वस्तु और सेवा कर लागू हुआ
103 वां संशोधन अधिनियम, 2019केंद्र सरकार द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों और निजी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षण लागू
संविधान (104 वां संशोधन) अधिनियम, 2020इसने लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एससी और एसटी के लिए सीटों का आरक्षण बढ़ाया।

शपथ पत्र (Affidavit) क्या होता है

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