भारतीय संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका क्या है | विशेषता | महत्व | मुख्य | सिद्धांत

जब भी बात भारत के संविधान की होती है तब इसमें सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण पक्ष आता है प्रस्तावना का क्यूकी यही एक चीज़ है जोकि पूरे संविधान की तस्वीर को बयां करती है |  सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है जब भी कभी संविधान में किसी भी प्रकार का संशोधन होगा और अगर वो प्रस्तावना के उद्देश्य को पूरा नहीं करता तो ऐसे संशोधन को शून्य घोषित किया जा सकता है, इसीलिये कहा गया है कि संविधान की प्रस्तावना पूरे संविधान का आधार है | प्रस्तावना में ही वो सब कुछ निहित है जोकि भारत के सभी व्यक्तियों को स्वतंत्रता का अनुभव कराती है | आज हम आपको यहाँ भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के बारे में विस्तार से बताएँगे |

इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) क्या बताती है ? इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी | साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य संविधान की महत्वपूर्ण बातों और उसकी प्रमुख विशेषताओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से संविधान के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

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प्रस्तावना

भारतीय संविधान में कितने भाग हैं

“हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :

न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक,

विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,

प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा,

उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढाने के लिए,

दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0

को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं |”

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प्रस्तावना (उद्देशिका) का क्या अर्थ है ?

1. प्रस्तावना (उद्देशिका) में हम पाते है, कि संविधान के अधिकार का स्रोत भारत के लोगों के साथ सम्मिलित है |

2. प्रस्तावना (उद्देशिका) भारत को समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणतंत्र राष्ट्र है, इस रूप में प्रदर्शित करती है

3. संविधान में प्रस्तावना (उद्देशिका) नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता को सुरक्षित करती है तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए भाईचारे को प्रोत्साहित करती है |

4. प्रस्तावना (उद्देशिका) में संविधान को स्वीकार्य करने की तिथि का भी उल्लेख किया गया है, जिससे भारत को इससे पहले स्वतंत्रता के लिए किये गए संघर्ष का स्मरण बना रहे |

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प्रस्तावना (उद्देशिका) प्रमुख शब्द और उनकी व्याख्या

प्रस्तावना के प्रमुख शब्दों की व्याख्या इस प्रकार है-

संप्रभुता का अर्थ

सम्प्रुभता शब्द का अर्थ है, कि भारत किसी भी विदेशी और आंतरिक शक्ति के नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त सम्प्रुभता सम्पन्न राष्ट्र है | भारत को अपनी सीमाओं के अंदर किसी दूसरे देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा |

समाजवादी शब्द का अर्थ

यह शब्द 1976 में हुए 42 वें संशोधन अधिनियम के द्वारा जोड़ा गया है, भारत ने ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’  को अपनाया है, इसका लक्ष्य गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसर की असमानता को समाप्त करना है |

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धर्मनिरपेक्ष शब्द का अर्थ

इस शब्द को 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम के द्वारा जोड़ा गया था | धर्मनिरपेक्ष शब्द का अर्थ भारत का कोई विशेष धर्म नहीं है यह सभी धर्मो को सामान रूप से देखता है और सभी धर्मों को राज्यों से समानता, सुरक्षा और समर्थन प्राप्त करने का बराबर अधिकार है |

लोकतांत्रिक शब्द का अर्थ

लोकतांत्रिक शब्द का अर्थ है, एक सरकार से है, जिसकी स्थापना भारत के व्यस्क नागरिकों के मतदान के द्वारा चुनी जाती है | इसका अर्थ सरकार की ताकत जनता के हाथ में है |

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गणराज्य शब्द का अर्थ

इस शब्द का अर्थ राजनीतिक संप्रभुता एक राजा की बजाय लोगों के हाथों में निहित होती है, राज्य का प्रमुख प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनता द्वारा चुना जाता है |

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मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) क्या है इसके बारे में जानकारी हो गई होगी | प्रस्तावना (उद्देशिका) के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इससे सम्बन्धित या अन्य किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट  बॉक्स  के  माध्यम  से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

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