सीआरपीसी की धारा 85 क्या है | Section 85 CRPC in Hindi


सीआरपीसी की धारा 85 क्या है

दंड प्रक्रिया सहिता में कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करनाइसका प्रावधान सीआरपीसी (CrPC) की धारा 85 में  किया गया है | यहाँ हम आपको ये बताने का प्रयास करेंगे कि दंड प्रक्रिया सहिता (CrPC) की धारा 85 के लिए किस तरह अप्लाई होगी | दंड प्रक्रिया सहिता यानि कि CrPC की धारा 85 क्या है ? इसके सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से यहाँ समझने का प्रयास करेंगे | आशा है हमारी टीम द्वारा किया गया प्रयास आपको पसंद आ रहा होगा |



(CrPC Section 85) Dand Prakriya Sanhita Dhara 85 (कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करना)

इस पेज पर दंड प्रक्रिया सहिता की धारा 85 में “कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करनाइसके बारे में क्या प्रावधान बताये गए हैं ? इनके बारे में पूर्ण रूप से इस धारा में चर्चा की गई है | साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 85 कब नहीं लागू होगी ये भी बताया गया है ? इसको भी यहाँ जानेंगे, साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की अन्य महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी  ले सकते हैं |

सीआरपीसी की धारा 43 क्या है



CrPC (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ) की धारा 85 के अनुसार :-

कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करना

(1) यदि उद्भोषित व्यक्ति उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट समय के अंदर हाजिर हो जाता है तो न्यायालय संपत्ति को कुर्की से निर्मुक्त करने का आदेश देगा।

(2) यदि उद्घोषित व्यक्ति उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट समय के अंदर हाजिर नहीं होता है तो कुर्क संपत्ति, राज्य सरकार के व्ययनाधीन रहेगी, और, उसका विक्रय कुर्की की तारीख से छह मास का अवसान हो जाने पर तथा धारा 84 के अधीन किए गए किसी दावे या आपत्ति का उस धारा के अधीन निपटारा हो जाने पर ही किया जा सकता है किंतु यदि वह शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील है या न्यायालय के विचार में विक्रय करना स्वामी के फायदे के लिए होगा तो इन दोनों दशाओं में से किसी में भी न्यायालय, जब कभी ठीक समझे, उसका विक्रय करा सकता है।

(3) यदि कुर्की की तारीख से दो वर्ष के अंदर कोई व्यक्ति, जिसकी संपत्ति उपधारा (2) के अधीन राज्य सरकार के व्ययनाधीन है या रही है, उस न्यायालय के समक्ष, जिसके आदेश से वह संपत्ति कुर्क की गई थी या उस न्यायालय के समक्ष, जिसके ऐसे न्यायालय अधीनस्थ है, स्वेच्छा से हाजिर हो जाता है या पकड़ कर लाया जाता है और उस न्यायालय को समाधानप्रद रूप में यह साबित कर देता है कि वह वारंट के निष्पादन से बचने के प्रयोजन से फरार नहीं हुआ या नहीं छिपा और यह कि उसे उद्घोषणा की ऐसी सूचना नहीं मिली थी जिससे वह उसमें विनिर्दिष्ट समय के अंदर हाजिर हो सकता तो ऐसी संपत्ति का, या यदि बह् विक्रय कर दी गई है तो विक्रय के शुद्ध आगमों का,

या यदि उसका केवल कुछ भाग विक्रय किया गया है तो ऐसे विक्रय के शुद्ध आगमों और अवशिष्ट संपत्ति का, कुर्की के परिणामस्वरूप उपगत सब खचों को उसमें से चुका कर, उसे परिदान कर दिया जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 42 क्या है

According to Section. 85 – “ Release, Sale And Restoration of Attached Property ”–

(1) If the proclaimed person appears within the time specified in the proclamation, the Court shall make an order releasing the property from the attachment.

(2) If the proclaimed person does not appear within the time specified in the proclamation, the property under the attachment shall be at the disposal of the State Government; but it shall not be sold until the expiration of six months from the date of the attachment and until any claim preferred or objection made under section 84 has been disposed under that section, unless it is subject to speedy and natural decay, or the Court considers that the sale would be for the benefit of the owner; in either of which cases the Court may cause it to be sold whenever it thinks fit.

(3) If, within two years from the date of the attachment, any person whose property is or has been at the disposal of the State Government, under sub- section (2), appears voluntarily or is apprehended and brought before the Court by whose order the property was attached, or the Court to which such Court is subordinate, and proves to the satisfaction of such Court that he did not abscond or conceal himself for the purpose of avoiding execution of the warrant, and that he had not such notice of the proclamation as to enable him to attend within the time specified therein, such property, or, if the same has been sold, the net proceeds of the sale, or, if part only thereof has been sold, the net proceeds of the sale and the

residue of the property, shall, after satisfying therefrom all costs incurred in consequence of the attachment, be delivered to him.

सीआरपीसी की धारा 41 क्या है 

आपको आज  दंड प्रक्रिया संहिता  की धारा 85 “कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करनाइसके  बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है |

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