सीआरपीसी की धारा 196 क्या है | Section 196 CRPC in Hindi


सीआरपीसी की धारा 196 क्या है

दंड प्रक्रिया सहिता में राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजनाइसका प्रावधान सीआरपीसी (CrPC) की धारा 196 में  किया गया है | यहाँ हम आपको ये बताने का प्रयास करेंगे कि दंड प्रक्रिया सहिता (CrPC) की धारा 196 के लिए किस तरह अप्लाई होगी | दंड प्रक्रिया सहिता यानि कि CrPC की धारा 196 क्या है ? इसके सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से यहाँ समझने का प्रयास करेंगे | आशा है हमारी टीम द्वारा किया गया प्रयास आपको पसंद आ रहा होगा |



(CrPC Section 196) Dand Prakriya Sanhita Dhara 196 (राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजना)

इस पेज पर दंड प्रक्रिया सहिता की धारा 196 में “राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजनाइसके बारे में क्या प्रावधान बताये गए हैं ? इनके बारे में पूर्ण रूप से इस धारा में चर्चा की गई है | साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 196 कब नहीं लागू होगी ये भी बताया गया है ? इसको भी यहाँ जानेंगे, साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की अन्य महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी  ले सकते हैं |

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CrPC (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ) की धारा 196 के अनुसार :-

राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजना-

(1) कोई न्यायालय,

(क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 6 के अधीन या धारा 153क, ‘[धारा 295क या धारा 505 की उपधारा (1)] के अधीन दंडनीय किसी अपराध का ; अथवा

(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का ; अथवा

(ग) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 108क में यथावर्णित किसी दुप्रेरण का, संज्ञान केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं।

*[(1क) कोई न्यायालय-

(क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 153 या धारा 505 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का, अथवा

(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का, संज्ञान केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं।]

(2) कोई न्यायालय भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 120ब के अधीन दंडनीय किसी आपराधिक षडयंत्र के किसी ऐसे अपराध का, जो मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध] करने के आपराधिक षडयंत्र से भिन्न है, संज्ञान तब तक नहीं करेगा जब तक राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट ने कार्यवाही शुरू करने के लिए लिखित सम्मति नहीं दे दी है :

परंतु जहाँ आपराधिक षडयंत्र ऐसा है जिसे धारा 195 के उपबंध लागू हैं वहां ऐसी कोई सम्मति आवश्यक न होगी।

(3) केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार, उपधारा (1) या उपधारा (1क) के अधीन मंजूरी देने के पूर्व और जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (1क) के अधीन मंजूरी देने से पूर्व.] और राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (2) के अधीन सम्मति देने के पूर्व, ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का नहीं है, प्रारंभिक अन्वेषण किए जाने का आदेश दे सकता है और उस दशा में ऐसे पुलिस अधिकारी की वे शक्तियां होंगी जो धारा 155 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट हैं।

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According to Section. 196 “ Prosecution for offences against the State and for criminal conspiracy to commit such offence ”–

(1) No Court shall take cognizance of-

(a) any offence punishable under Chapter VI or under section 153A, of Indian Penal Code, or 2 Section 295 A or sub section (1) of section 505] of the Indian Penal Code (45 of 1860 ) or

(b) a criminal conspiracy to commit such offence, or

(c) any such abetment, as is described in section 108A of the Indian Penal Code (45 of 1860 ), except with the previous sanction of the Central Government or of the State Government.

(1A) 2 No Court shall take cognizance of-

(a) any offence punishable under section 153B or sub- section (2) or sub- section (3) of section 505 of the Indian Penal Code (45 of 1860 ), or

(b) a criminal conspiracy to commit such offence, except with the previous sanction of the Central Government or of the State Government or of the District Magistrate.]

(2) No Court shall take cognizance of the offence of any criminal conspiracy punishable under section 120B of the Indian Penal code (45 of 1860 ), other than a criminal conspiracy to commit 1 an offence] punishable with death, imprisonment for life or rigorous imprisonment for a term of two years or upwards, unless the State Government or the District Magistrate has consented in writing to the initiation of the proceedings: Provided that where the criminal conspiracy is one to which the provisions of section 195 apply, no such consent shall be necessary.

(3) The Central Government or the State Government may, before according sanction 2 under sub- section (1) or sub- section (1A) and the District Magistrate may, before according sanction under sub- section (1A) and the State Government or the District Magistrate may, before giving consent under sub- section (2), order a preliminary investigation by a police officer not being below

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आपको आज  दंड प्रक्रिया संहिता  की धारा 196 “राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजना इसके  बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है |

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