घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 12 क्या है


घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 क्या है

आज हम आपके लिए इस पेज पर घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) की धारा 12 की जानकारी लेकर आये है | यहाँ हम आपको बताएँगे  कि घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) की धारा 12 किस प्रकार से परिभाषित की गई है और इसका क्या अर्थ है ? घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 क्या है, इसके बारे में आप यहाँ जानेंगे |

मजिस्ट्रेट को आवेदन

इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ धारा 12 क्या बताती है ? इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी | साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) की महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |



[Domestic violence act Sec. 12 in Hindi]

घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 1 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 2 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 3 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 4 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 5 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 6 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 7 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 8 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 9 क्या है
घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 10 क्या है

घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 9 क्या है

Domestic Violence (घरेलू हिंसा अधिनियम) की धारा 12 के अनुसार :-

मजिस्ट्रेट को आवेदन

(1) कोई व्यथित व्यक्ति या संरक्षण अधिकारी या व्यथित की ओर से कोई अन्य व्यक्ति, इस अधिनियम के अधीन एक या अधिक अनुतोष प्राप्त करने के लिए मजिस्ट्रेट को आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा:

परन्तु मजिस्ट्रेट, ऐसे आवेदन पर कोई आदेश पारित करने से पहले, संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता से उसके द्वारा प्राप्त, किसी घरेलू हिंसा की रिपोर्ट पर विचार करेगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन ईप्सित किसी अनुतोष में वह अनुतोष भी सम्मिलित हो सकेगा जिसके लिए किसी प्रत्यर्थी द्वारा की गई घरेलू हिंसा के कार्यों द्वारा कारित की गई क्षतियों के लिए प्रतिकर या नुकसान के लिए वाद संस्थित करने के ऐसे व्यक्ति के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी प्रतिकर या नुकसान के संदाय के लिए कोई आदेश जारी किया जाता है:

परन्तु जहाँ किसी न्यायालय द्वारा, प्रतिकर या नुकसानी के रूप में किसी रकम के लिए, व्यथित व्यक्ति के पक्ष में कोई डिक्री पारित की गई है यदि इस अधिनियम के अधीन, मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए किसी आदेश के अनुसरण में कोई रकम संदत्त की गई है या संदेय है तो ऐसी डिक्री के अधीन संदेय रकम के विरुद्ध मुजरा होगी और सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, वह डिक्री, इस प्रकार मुजरा किए जाने के पश्चात् अतिशेष रकम के लिए, यदि कोई हो, निष्पादित की जाएगी।

(3) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन, ऐसे प्ररूप में और ऐसी विशिष्टयाँ जो विहित की जाएं या यथासम्भव उसके निकटतम रूप में अन्तर्विष्ट होगा।

(4) मजिस्ट्रेट, सुनवाई की पहली तारीख नियत करेगा जो न्यायालय द्वारा आवेदन की प्राप्ति की तारीख से सामान्यत: तीन दिन से अधिक नहीं होगी।

(5) मजिस्ट्रेट, उपधारा (1) के अधीन दिए गए प्रत्येक आवेदन का, प्रथम सुनवाई की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर निपटारा करने का प्रयास करेगा।

According to Section 12 –  “ Application to Magistrate ”

 (1) An aggrieved person or a Protection Officer or any other person on behalf of the aggrieved person may present an application to the Magistrate seeking one or more reliefs under this Act:

Provided that before passing any order on such application, the Magistrate shall take into consideration any domestic incident report received by him from the Protection Officer or the service provider.

(2) The relief sought for under sub-section (1) may include a relief for issuance of an order for payment of compensation or damages without prejudice to the right of such person to institute a suit for compensation or damages for the injuries caused by the acts of domestic violence committed by the respondent:

Provided that where a decree for any amount as compensation or damages has been passed by any court in favour of the aggrieved person, the amount, if any, paid or payable in pursuance of the order made by the Magistrate under this Act shall be set off against the amount payable under such decree and the decree shall, notwithstanding anything contained in the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908), or any other law for the time being in force, be executable for the balance amount, if any, left after such set off.

(3) Every application under sub-section (1) shall be in such form and contain such particulars as may be prescribed or as nearly as possible thereto.

(4) The Magistrate shall fix the first date of hearing, which shall not ordinarily be beyond three days from the date of receipt of the application by the court.

(5) The Magistrate shall Endeavour to dispose of every application made under sub-section (1) within a period of sixty days from the date of its first hearing.

घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 10 क्या है

मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) की धारा 12 के बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 11 क्या है

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4 thoughts on “घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 12 क्या है”

  1. Mere Shadi 2009 me huye the.1 bachha hone ke bad khatam ho gya uske bad koi baccha nahi 1feb 2021 me hath me kuch marke mere khilaf 100 dal kar fir karye ho mlc nahi bane uske ma aye ghar se mere bina ijjat ke leke chal gye uske bad delhi caw me case kiya or 2 paise attend ke usme usne likha mujhe nagi rahna chahte ab mujhe Mahila court se notice aya hai 7jun ko paise jisme mere ristedaro ke name bhi hai .mere khila sab jute arop hai 10 sal mene unse 10 lakh liye hai jo jhot hai or nahi unke pass aisa koi avidence ki wo sabit kar sake ki mene 5000 bhi liye ho

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  2. Or to mujhse 44000 per month kharcha maga hai me private job karta hu jisme mere salary 15400 per month hai

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  3. 15 वर्ष पहले एक वयक्ति उसकी बेटी (बेटी की दोस्त)के साथ पढ़ने वाली लड़की के साथ बलात्कार किया उसके बाद सामाजिक बैठक हुई (लडकी के पिता मानसिक विकलांग हैं )तो बलात्कारी व्यक्ति के साथ समाज के लोगो द्वारा शादी करा दी गयी आज उसकी 3 बच्चे हैं (पहला बच्चा 14 वर्ष ,दूसरा बच्चा 12 वर्ष ,3 बच्चा 7 वर्ष) पर उसी दौरान उस लड़की के साथ प्रताड़ित भी करता था आज वही व्यक्ति द्वारा सामाजिक बैठक कर स्टाम्प पेपर पर तलाक ले लिया उसे घर से निकल दिया गया हैं जबकि जिस घर मे पूरा परिवार रहता हैं उसी लड़की का घर हैं उसे और उसके तीनो बच्चों को भी घर से निकल लिया गया हैं आज वे भाड़े के घर मे रहतें हुए जीवन यापन कर रहे हैं महिला सेल में गयी तो उन्होंने डोमेस्टिक वोइलेंस सेक्शन 12 में केस फ़ाइल किये पर उसमे उसके बलात्कार के संबंध में कोई विवरण नही लिखा गया हैं क्या उस पीड़ित के लिए कोई उपचार हैं अगर हैं तो कीस धारा में जाये और क्या करे सलाह दीजिये

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