एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) धारा 2 क्या है | SC ST Act Section 2 in Hindi – (परिभाषाएं)


एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) की धारा 2 क्या है

आज हम आपके लिए इस पेज पर एससी एसटी एक्ट (SC ST Act) की धारा 2 की जानकारी लेकर आये है | यहाँ हम आपको बताएँगे  कि एससी एसटी एक्ट (SC-ST Act) की धारा 2 किस प्रकार से परिभाषित की गई है और इसका क्या अर्थ है ? एससी एसटी एक्ट की धारा 2 क्या है, इसके बारे में आप यहाँ जानेंगे |

परिभाषाएं

इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ धारा 2 क्या बताती है ? इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी | साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य एससी एसटी एक्ट (SC-ST Act) की महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

[SC – ST Act Sec. 2 in Hindi]

एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) धारा 1 क्या है



SC ST Act (एससी एसटी एक्ट) की धारा 2 के अनुसार :-

परिभाषाएं

(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से गन्यया अपेक्षित न हो,

(क) “अत्याचार’ से धारा 3 के अधीन दग्नीय अपराध अभिप्रेत है।

(ख) “संहिता” से दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) अभिप्रेत है।

(ग) “अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के वही गर्व जो संविधान के अनुच्छेद 366 के बैंक (24) और खंड (25) में है

(घ) “विशेष न्यायालय” से धारा 14 में विशेष न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट कोई सैशन न्यायालय अभिप्रेत है;

(ङ) “विशेष लोक अभियोजक’ से विशेष लोक अभियोजक के रूप में विनिर्दिष्ट लोक अभियोजक या धाव 15 में निर्दिष्ट अधिवक्ता अभिप्रेत है;

(च) उन शब्दों और पदों के जो इस अधिनियम में प्रयुक्त किये हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं गौर संहिता या भारतीय दंड संहिता में परिभाषित है, वही अर्थ है जो यथास्थिति, संहिता में या भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) में है।

(2) इस अधिनियम में किसी अधिनियमित या उसके किसी उपबंध के प्रति किसी निर्देश का अर्थ, किसी ऐसे क्षेत्र के संबंध में जिसमें ऐसी अधिनियमित था ऐसा उपबंध प्रवृत्त नहीं है, यह लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त तत्थानी विधि, यदि कोई हो, के प्रति निर्देश है।

एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) धारा 3 क्या है

According to SC-ST Act Section 2 –       “Definitions”–

 (1) In this Act, unless the context otherwise requires,—

(a) “atrocity” means an offence punishable under section 3;

(b) “Code” means the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974);

(c) “Scheduled Castes and Scheduled Tribes” shall have the meanings assigned to them respectively under clause (24) and clause (25) of article 366 of the Constitution;

(d) “Special Court” means a Court of Session specified as a Special Court in section 14;

(e) “Special Public Prosecutor” means a Public Prosecutor specified as a Special Public Prosecutor or an advocate referred to in section 15;

(f) words and expressions used but not defined in this Act and defined in the Code or the Indian Penal Code (45 of 1860) shall have the meanings assigned to them respectively in the Code, or as the case may be, in the Indian Penal Code.

(2) Any reference in this Act to any enactment or any provision thereof shall, in relation to an area in which such enactment or such provision is not in force, be construed as a reference to the corresponding law, if any, in force in that area.

एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) धारा 4 क्या है

मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज एससी एसटी एक्ट (SC-ST Act) की धारा 2 के बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे  इस धारा  को  लागू  किया  जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट  बॉक्स  के  माध्यम  से  अपने प्रश्न और  सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) धारा 5 क्या है

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