एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) धारा 23 क्या है | SC ST Act Section 23 in Hindi


एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) की धारा 23 क्या है

आज हम आपके लिए इस पेज पर एससी एसटी एक्ट (SC ST Act) की धारा 23 की जानकारी लेकर आये है | यहाँ हम आपको बताएँगे  कि एससी एसटी एक्ट (SC-ST Act) की धारा 23 किस प्रकार से परिभाषित की गई है और इसका क्या अर्थ है ? एससी एसटी एक्ट की धारा 23 क्या है, इसके बारे में आप यहाँ जानेंगे |

नियम बनाने की शक्ति

इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ धारा 23 क्या बताती है ? इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी | साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य एससी एसटी एक्ट (SC-ST Act) की महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

[SC – ST Act Sec. 23 in Hindi]

एससी एसटी अधिनियम (एक्ट) धारा 20 क्या है



SC ST Act (एससी एसटी एक्ट) की धारा 23 के अनुसार :-

नियम बनाने की शक्ति

(1) केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।

(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा। यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी। यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन कले के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा। यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा, किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की, विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

According to SC-ST Act Section 23 –    “Power to make rules”–

 (1) The Central Government may, by notification in the Official Gazette, make rules for carrying out the purposes of this Act.

(2) Every rule made under this Act shall be laid, as soon as may be after it is made, before each House of Parliament, while it is in session for a total period of thirty days which may be comprised in one session or in two or more successive sessions, and if, before the expiry of the session immediately following the session or the successive sessions aforesaid, both Houses agree in making any modification in the rule or both Houses agree that the rule should not be made, the rule shall thereafter have effect only in such modified form or be of no effect, as the case may be; so, however, that any such modification or annulment shall be without prejudice to the validity of anything previously done under that rule.

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मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज एससी एसटी एक्ट (SC-ST Act) की धारा 23 के बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे  इस धारा  को  लागू  किया  जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट  बॉक्स  के  माध्यम  से  अपने प्रश्न और  सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

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