आईपीसी धारा 467 क्या है | IPC Section 467 in Hindi – विवरण, सजा का प्रावधान | मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत की कूटरचना


आईपीसी धारा 467 क्या है

आज के इस आर्टिकल में यहाँ इस पेज पर मित्रों आपके लिए हम लेकर आये हैं, भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के बारे में जानकारी जिसमे बताया गया है कि किसी के द्वारा यदि मूल्यवान प्रतिभूति वसीयत या किसी मूल्यवान प्रतिभूति को बनाने या हस्तांतरण करने का प्राधिकार, या कोई धन प्राप्त करने आदि के लिए कूटरचना की जाये तो किस प्रकार का अपराध होगा |

यहाँ आपको हम बातएंगे कि इसके लिए दंड का प्रावधान किन धाराओं में किया गया है | आज हम आपको इसी से सम्बंधित धारा यानि कि IPC की धारा 467 क्या है ? इसको यहाँ डिस्कस करेंगे इस आर्टिकल कि माध्यम से इसके बारे में पूरी जानकारी यहाँ प्रस्तुत करेंगे |

यहाँ आपको इस पेज पर भारतीय दंड संहिता की धारा 467 में सजा  के लिए क्या बातें बताई गई है और उसमे किस प्रकार से कितनी सजा देने का प्रावधान है इन सब विषयों के बारे में विस्तार से चर्चा देखने को मिलेगी | साथ ही इसमें जमानत होगी या नहीं ये भी इस आर्टिकल में कवर किया गया है  आपको ये भी बता दें कि यहाँ इस पोर्टल पर अन्य महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया है आप सेक्शन वाइज उनका भी अवलोकन कर सकते हैं |



आईपीसी धारा 499 क्या है

 IPC (भारतीय दंड संहिता की धारा ) की धारा 467 के अनुसार :-

मूल्यवान प्रतिभूति, विल, इत्यादि की कूटरचना–

“जो काई किसी ऐसी दस्तावेज की, जिसका कोई मूल्यवान प्रतिभूति या विल या पुत्र के दत्तकग्रहण का प्राधिकार होना तात्पर्यित हो, अथवा जिसका किसी मूल्यवान प्रतिभूति की रचना या अन्तरण का, या उस पर के मूलधन, ब्याज या लाभांश को प्राप्त करने का, या किसी धन, जंगम सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को प्राप्त करने या परिदत्त करने का प्राधिकार होना तात्पर्यित हो, अथवा किसी दस्तावेज को, जिसका धन दिए जाने की अभिस्वीकृति करने वाला निस्तारणपत्र या रसीद होना, या किसी जंगम संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के परिधान के लिए निस्तारणपत्र या रसीद होना तात्पर्यिंत हो, कूटरचना करेगा वह [आजीवन कारावास से, या दानों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा “ |

S. 467 – “Forgery of valuable security, will, etc ”

Whoever forges a document which purports to be a valuable security or a will, or an authority to adopt a son, or which purports to give authority to any person to make or transfer any valuable security, or to receive the principal, interest or dividends thereon, or to receive or deliver any money, movable property, or valuable security, or any document purporting to be an acquaintance or receipt acknowledging the payment of money, or an acquaintance or receipt for the delivery of any movable property or valuable security, shall be punished with 1[imprisonment for life], or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

आईपीसी धारा 363 क्या है

लागू अपराध

1. मूल्यवान प्रतिभूति वसीयत या किसी मूल्यवान प्रतिभूति को बनाने या हस्तांतरण करने का प्राधिकार, या कोई धन प्राप्त करने आदि के लिए कूटरचना। इसमें सजाआजीवन कारावास या 10 वर्ष कारावास साथ में आर्थिक दंड भी दिया जायेगा

यह एक गैरजमानती, गैरसंज्ञेय अपराध है |

2. अगर मूल्यवान प्रतिभूति केंद्र सरकार का एक वचनपत्र है।

सजाआजीवन कारावास या 10 वर्ष कारावास + आर्थिक दंड।

 

आईपीसी की धारा 467 में सजा (Punishment) क्या होगी

किसी के द्वारा मूल्यवान प्रतिभूति वसीयत या किसी मूल्यवान प्रतिभूति को बनाने या हस्तांतरण करने का प्राधिकार, या कोई धन प्राप्त करने आदि के लिए कूटरचना करना ये भारतीय दंड संहिता में अपराध माना गया है | इसमें यहाँ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 467 में इस अपराध के लिए दंड देने का प्रावधान है | इस धारा में सजा

1.आजीवन कारावास  या 10 वर्ष कारावास  साथ में आर्थिक दंड भी दिया जायेगा ।

यह एक गैर-जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है |

2. अगर मूल्यवान प्रतिभूति केंद्र सरकार का एक वचन-पत्र है।

सजा – आजीवन कारावास या 10 वर्ष कारावास + आर्थिक दंड।

आपको यहाँ यह भी जानना चाहिए कि यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध होता है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

आईपीसी धारा 353 क्या है

आईपीसी (IPC) की धारा 467 में  जमानत  (BAIL) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 467 में जिस अपराध की सजा के बारे में बताया गया है उसका अपराध  एक जमानती और गैरसंज्ञेय अपराध है | यहाँ आपको मालूम होना चाहिए कि गैर-संज्ञेय अपराध और जमानतीय होने पर इसमें जमानत मिलती है साथ ही यह प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होता है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

दोस्तों आज हमने आपको यहाँ  इस आर्टिक्ल के माध्यम से  भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 467 यानि कि “Forgery of valuable security, will  या ‘मूल्यवान प्रतिभूति, विल, इत्यादि की कूटरचना’ करने पर क्या होता है और इसके लिए क्या सजा होगी  इन सब के बारे में बताया और इसमें सजा के साथ ही जमानत के क्या प्रावधान होंगे इसकी जानकारी भी दी | यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित कुछ भी शंका आपके मन में हो या इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप हमसे बेझिझक पूँछ सकते है |

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