आईपीसी धारा 330 क्या है | IPC Section 330 in Hindi – विवरण सजा का प्रावधान


आईपीसी धारा 330 क्या है

आज हम आपके लिए इस पेज पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 330 की जानकारी लेकर आये है | यहाँ हम आपको बताएँगे  कि भारतीय दंड सहिता (IPC) की धारा 330 किस प्रकार से परिभाषित की गई है और इसका क्या अर्थ है ? भारतीय दंड संहिता यानि कि आईपीसी (IPC)  की धारा 330 क्या है,  इसके बारे में आप यहाँ जानेंगे |

संस्वीकृति उद्दापित करने या विवश करके संपत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना

इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ धारा 330 क्या बताती है ? इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी | साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य भारतीय दंड संहिता (IPC) की महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |


आईपीसी धारा 327 क्या है

IPC (भारतीय दंड संहिता की धारा) की धारा 330 के अनुसार :-

संस्वीकृति उद्दापित करने या विवश करके संपत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना

कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकृति या कोई जानकारी, जिससे किसी अपराध अथवा अवचार का पता चल सके. उदापित की जाए अथवा उपडत व्यक्ति या उससे हितबद्ध व्यक्ति को मजबूर किया जाए कि वह कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति प्रत्यावर्तित करे, या करवाए, या किसी दावे या मांग की पुष्टि या ऐसी जानकारी दे जिससे किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति का प्रत्यावर्तन कराया जा सके, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

दृष्टांत

(क) क, एक पुलिस आफिसर, य को यह संस्वीकृति करने को कि उसने अपराध किया है उत्प्रेरित करने के लिए यातना देता है | क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी हैं |

(ख) क, एक पुलिस आफिसर, यह बतलाने को कि अमुक चुराई हुई सम्पत्ति कला रखी है उत्प्रेरित करने के लिए ख को यातना देता है | क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी हैं |

(ग) क, एक राजस्व आफिसर, राजस्व की वह बकाया, जो य द्वारा शोध्य है, देने को य को विवश करने के लिए उसे यातना देता है | क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी हैं |

(घ) क,एक जमींदार भाटक देने को विवश करने के लिए अपनी एक रैयत को यातना देता है | क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी हैं |

आईपीसी धारा 328 क्या है

Section 330 – “Voluntarily causing hurt to extort confession, or to compel restoration of property”–

 “Whoever voluntarily causes hurt for the purpose of extorting from the sufferer or from any person interested in the sufferer, any confession or any information which may lead to the detection of an offence or misconduct, or for the purpose of constraining the sufferer or any person inter­ested in the sufferer to restore or to cause the restoration of any property or valuable security or to satisfy any claim or demand, or to give information which may lead to the restoration of any property or valuable security, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine. “

Illustrations

(a) A, a police-officer, tortures Z in order to induce Z to confess that he committed a crime. A is guilty of an offence under this section.

(b) A, a police-officer, tortures B to induce him to point out where certain stolen property is deposited. A is guilty of an offence under this section.

(c) A, a revenue officer, tortures Z in order to compel him to pay certain arrears of revenue due from Z. A is guilty of an offence under this section.

(d) A, a zamindar, tortures a raiyat in order to compel him to pay his rent. A is guilty of an offence under this section.

आईपीसी धारा 332 क्या है 

लागू अपराध

संस्वीकॄति या संपत्ति की जानकारी आदि जबरन प्राप्त करने के लिए स्वेच्छया क्षति कारित करना

सजा – 7 वर्ष कारावास और  आर्थिक दण्ड |

यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

आईपीसी धारा 336 क्या है

आईपीसी की धारा 330 में सजा (Punishment) क्या होगी

यहाँ भारतीय दंड संहिता में धारा 330 किये गए अपराध के लिए सजा को निर्धारित किया गया हैं | जो इस प्रकार है – संस्वीकॄति या संपत्ति की जानकारी आदि जबरन प्राप्त करने के लिए स्वेच्छया क्षति कारित करना, उसको 7 वर्ष कारावास और आर्थिक दण्ड से दण्डित |

आईपीसी धारा 337 क्या है

आईपीसी (IPC) की धारा 330 में  जमानत  (BAIL) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 330 में जिस अपराध की सजा के बारे में बताया गया है उस अपराध को एक जमानती अपराध बताया गया है | यहाँ आपको मालूम होना चाहिए कि जमानतीय अपराध होने पर इसमें जमानत मिल जाती है, क्योंकी CrPC में यह जमानतीय अपराध बताया गया है ।

आईपीसी धारा 338 क्या है

मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 330 के बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट  बॉक्स  के  माध्यम  से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

आईपीसी धारा 340 क्या है

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा के लिए कानूनी आवेदन करने से रोकने के लिए उसे प्रेरित करने की धमकी देना7 वर्ष कारावास और (+) आर्थिक दण्डसंज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय (ट्रायल किया जा सकता)

आईपीसी धारा 341 क्या है

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