आईपीसी धारा 370 क्या है | IPC Section 370 in Hindi – विवरण, सजा का प्रावधान

आईपीसी धारा 370 क्या है

भारतीय दंड संहिता में व्यक्ति का दुर्व्यापार करनाएक अपराध माना गया है और इसके लिए दण्ड का प्रावधान (IPC) की धारा 370 में  किया गया है | यहाँ हम आपको ये बताने का प्रयास करेंगे कि भारतीय दंड सहिता (IPC) की धारा 370 किस तरह अप्लाई होगी | भारतीय दंड संहिता यानि कि IPC की धारा 370 क्या है ? इसके सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से यहाँ समझने का प्रयास करेंगे | आशा है हमारी टीम द्वारा किया गया प्रयास आपको पसंद आ रहा होगा |

आईपीसी धारा 375 क्या है

(IPC Section 370) व्यक्ति का दुर्व्यापार करना

इस पेज पर भारतीय दंड सहिता की धारा 370 में “व्यक्ति का दुर्व्यापार करने के लिए दण्ड” के बारे में क्या प्रावधान बताये गए हैं, और इसमें कितनी सजा देने की बात कही गई है? इनके बारे में पूर्ण रूप से इस धारा में चर्चा की गई है | साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 370 में जमानत के बारे में क्या बताया गया है ? इसको भी यहाँ जानेंगे, साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी  ले सकते हैं |

आईपीसी धारा 377 क्या है

IPC (भारतीय दंड संहिता की धारा ) की धारा 370 के अनुसार :-

व्यक्ति का दुर्व्यापार

जो  कोई, शोषण के प्रयोजन के लिए –

पहला – धमकियों का प्रयोग करके ; या

दूसरा – बल या किसी प्रकार के प्रपीड़न का प्रयोग करके; या

तीसरा –  अपहरण द्वारा ; या

चौथा –  कपट का प्रयोग करके या प्रवंचना द्वारा ; या

पांचवां – शक्ति का दुरूपयोग करके; या

छटवां – उत्प्रेरणा द्वारा ; जिसके अंतर्गत ऐसे किसी व्यक्ति की, जो भर्ती, परिवहित, आश्रयीत, स्थानांतरित या गृहीत व्यक्ति पर नियंत्रण रखता है,सम्मति प्राप्त करने के लिए भुगतान या फायदे देना या प्राप्त करना भी आता है |

किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को, (क) भर्ती करता है, (ख) परिवहनीत करता है, (ग) संश्रय देता है, (घ) स्थानान्तरण करता है, या (ङ) गृहीत करता है, वह (तस्करी) दुर्व्यापार का अपराध करता है।

(1) जो भी कोई (तस्करी) दुर्व्यपार का अपराध करेगा, तो उसे कम से कम 7 वर्ष का कठोर कारावास जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

(2) जो भी कोई एक से अधिक व्यक्ति की (तस्करी) दुर्व्यपार का अपराध करेगा, तो उसे कम से कम 10 वर्ष का कठोर कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

(3) जो भी कोई एक नाबालिग की (तस्करी) दुर्व्यपार का अपराध करेगा, तो उसे कम से कम 10 वर्ष का कठोर कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

(4) जो भी कोई एक से अधिक नाबालिग की (तस्करी) दुर्व्यपार का अपराध करेगा, तो उसे कम से कम 14 वर्ष का कठोर कारावास जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

(5) यदि कोई व्यक्ति नाबालिग की (तस्करी) दुर्व्यपार के अपराध में एक से अधिक बार दोषी करार हुआ है, तो उसे आजीवन कारावास जिसका मतलब है कि उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए या मृत्यु होने तक कारावास की सज़ा से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

(6) यदि कोई लोक सेवक या पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी में अंतर्वलित (शामिल) है, तो ऐसे लोक सेवक या पुलिस अधिकारी को आजीवन कारावास जिसका मतलब है कि उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए या मृत्यु होने तक कारावास की सज़ा से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

Criminal Law (Amendment) Act, 2013

According to Section. 370 – “Trafficking of persons”–

“Whoever, for the purpose of exploitation, (a) recruits, (b) transports, (c) harbours, (d) transfers, or (e) receives, a person or persons, by—

First- using threats, or

Second- using force, or any other form of coercion, or

Thirdly- by abduction, or

Fourthly- by practising fraud, or deception, or

Fifthly- by abuse of power, or

Sixthly- by inducement, including the giving or receiving of payments or benefits, in order to achieve the consent of any person having control over the person recruited, transported, harboured, transferred or received,
commits the offence of trafficking
1.
Explanations : 1. The expression “exploitation” shall include any act of physical exploitation or any form of sexual exploitation, slavery or practices similar to slavery, servitude, or the forced removal of organs.
Explanations: 2. The consent of the victim is immaterial in determination of the offence of trafficking
1.

1. Whoever commits the offence of trafficking shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than seven years, but which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

2. Where the offence involves the trafficking1 of more than one person, it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than ten years but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.

3. Where the offence involves the trafficking of a minor, it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than ten years, but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.

4. Where the offence involves the trafficking of more than one minor, it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than fourteen years, but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.

5. If a person is convicted of the offence of trafficking of minor on more than one occasion, then such person shall be punished with imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person’s natural life, and shall also be liable to fine.

6. When a public servant or a police officer is involved in the trafficking of any person then, such public servant or police officer shall be punished with imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person’s natural life, and shall also be liable to fine.

1 Criminal Law (Amendment) Act, 2013

आईपीसी धारा 380 क्या है

OffencePunishment
Trafficking of person   7 to 10 years + Fine  
Trafficking of more than one person  10 years to Life + Fine  
Trafficking of minor  10 years to Life + Fine  
Trafficking of more than one minor  14 years to Life + Fine  
Person convicted of offence of trafficking of minor on more than one occasion  Imprisonment for Natural-Life + Fine  
Public servant or a police officer involved in trafficking of minorImprisonment for Natural-Life + Fine

आईपीसी धारा 384 क्या है

लागू अपराध (IPC Section 370)

व्यक्ति का दुर्व्यापार (Trafficking of persons)

1. व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी ।

सजा7 से 10 वर्ष कारावास और आर्थिक दण्ड।

यह एक गैरजमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

2. एक से अधिक व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी ।

सजा10 वर्ष से आजीवन कारावास और आर्थिक दण्ड।

यह एक गैरजमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

3. नाबालिग व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी ।

सजा10 वर्ष से आजीवन कारावास और आर्थिक दण्ड।

यह एक गैरजमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

4. एक से अधिक नाबालिग व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी ।

सजा14 वर्ष से आजीवन कारावास और आर्थिक दण्ड।

यह एक गैरजमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

5. नाबालिग की तस्करी के अपराध में एक से अधिक बार दोषी।

सजाआजीवन जिसका अर्थ है शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास और आर्थिक दण्ड।

यह एक गैर- जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

6. यदि कोई लोक सेवक या पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति / व्यक्तियों की तस्करी में शामिल है

सजाआजीवन जिसका अर्थ है शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास और आर्थिक दण्ड।

यह एक गैर- जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

आईपीसी धारा 392 क्या है 

आईपीसी की धारा 370 में सजा (Punishment) क्या होगी

व्यक्ति का दुर्व्यापार (Trafficking of persons) करना अपराध माना गया है , इसके लिए दंड का निर्धारण  भारतीय दंड संहिता में धारा 370 के तहत किया गया है | यहाँ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 370 में ऐसा अपराध करने पर उपरोक्त के अनुसार कारावास, और आर्थिक दण्ड, दिए जायेंगे

आईपीसी धारा 395 क्या है

आईपीसी (IPC) की धारा 370 में  जमानत  (BAIL) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 370 में जिस अपराध की सजा के बारे में बताया गया है उस अपराध को एक जमानती और गैर- संज्ञेय अपराध बताया गया है | यहाँ आपको मालूम होना चाहिए कि गैर- जमानतीय अपराध होने पर इसमें जमानत  में मुश्किल आती है  क्योकि  इसको CrPC में संज्ञेय श्रेणी का गैर- जमानतीय अपराध में बताया गया है |

आपको आज भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 370 के बारे में जानकारी हो गई होगी | इसमें  क्या अपराध बनता है, कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा | इस अपराध को कारित करने पर क्या सजा होगी ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, साथ ही इसमें जमानत के क्या प्रावधान होंगे ? यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है |

आईपीसी धारा 366 क्या है

 संज्ञेयजमानतविचारणीय
1संज्ञेयगैर -जमानतीयसत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय
2संज्ञेयगैर -जमानतीयसत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय
3संज्ञेयगैर -जमानतीयसत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय
4संज्ञेयगैर -जमानतीयसत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय
5संज्ञेयगैर -जमानतीयसत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय
6संज्ञेयगैर -जमानतीयसत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय

आईपीसी धारा 365 क्या है

 अपराध  सजा
1व्यक्ति की तस्करी  7 से 10 साल + जुर्माना
2एक से अधिक व्यक्ति की तस्करी  जीवन के लिए 10 साल + जुर्माना
3नाबालिग की तस्करी  जीवन के लिए 10 साल + जुर्माना  
4एक से अधिक नाबालिगों की तस्करी  जीवन के लिए 14 साल + जुर्माना
5एक से अधिक अवसरों पर नाबालिग की तस्करी के अपराध के दोषी व्यक्ति  प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास + जुर्माना
6लोक सेवक या नाबालिग की तस्करी में शामिल एक पुलिस अधिकारी  प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास + जुर्माना

आईपीसी धारा 363 क्या है

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