आईपीसी धारा 393 क्या है | IPC Section 393 in Hindi – सजा का प्रावधान

आईपीसी धारा 393 क्या है

आज हम आपके लिए इस पेज पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 393 की जानकारी लेकर आये है | यहाँ हम आपको बताएँगे  कि भारतीय दंड सहिता (IPC) की धारा 393 किस प्रकार से परिभाषित की गई है और इसका क्या अर्थ है ? भारतीय दंड संहिता यानि कि आईपीसी (IPC)  की धारा 393 क्या है,  इसके बारे में आप यहाँ जानेंगे |

लूट करने का प्रयत्न

इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ धारा 393 क्या बताती है ? इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी | साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य भारतीय दंड संहिता (IPC) की महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

आईपीसी धारा 392 क्या है

IPC (भारतीय दंड संहिता की धारा) की धारा 393 के अनुसार :-

लूट करने का प्रयत्न

जो कोई लूट करने का प्रयत्न करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

Section 393 – “Attempt to commit robbery”–

“Whoever attempts to commit robbery shall be punished with rigorous imprisonment for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.”

आईपीसी धारा 394 क्या है 

 लागू अपराध

लूट करने का प्रयत्न करना

सजा 7 साल के लिए कठोर कारावास + जुर्माना

यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी  मजिस्ट्रेट  द्वारा विचारणीय है।

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

आईपीसी धारा 395 क्या है

आईपीसी की धारा 393 में सजा (Punishment) क्या होगी

यहाँ भारतीय दंड संहिता में धारा 393 में किये गए अपराध के लिए सजा को निर्धारित किया गया हैं | जो इस प्रकार है – लूट करने का प्रयत्न करना, उसको 7 साल के लिए कठोर कारावास + जुर्माना दण्ड  से दण्डित किया जा सकता है |

आईपीसी धारा 397 क्या है

आईपीसी (IPC) की धारा 393 में  जमानत  (BAIL) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 393 में जिस अपराध की सजा के बारे में बताया गया है उस अपराध को एक संज्ञेय गैर – जमानतीय अपराध बताया गया है | यहाँ आपको मालूम होना चाहिए कि गैर – जमानतीय अपराध होने पर इसमें जमानत मिलने में मुश्किल आती  है क्योंकी CrPC में यह गैर – जमानतीय अपराध बताया गया है ।

इसमें जमानत मजिस्ट्रेट के विवेक पर निर्भर करती है | अगर मजिस्ट्रेट को लगता है ऐसा कि जमानत देने में कोई समाज को नुकसान नहीं पहुंचाएगा आरोपित व्यक्ति और पहले का उसका कोई क्राइम रिकॉर्ड नहीं है ऐसे में कई बिंदुओं पर विचार करने पर ही गैर – जमानतीय अपराध में जमानत दी जाती है |

आईपीसी धारा 389 क्या है

मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 393 के बारे में जानकारी हो गई होगी | कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट  बॉक्स  के  माध्यम  से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

आईपीसी धारा 386 क्या है

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
लूट करने का प्रयत्न करना7 साल के लिए कठोर कारावास + जुर्मानासंज्ञेयगैर जमानतीयप्रथम श्रेणी  मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय

आईपीसी धारा 384 क्या है 

यदि आप अपने सवाल का उत्तर प्राइवेट चाहते है तो आप अपना सवाल कांटेक्ट फॉर्म के माध्यम से पूछें |

Leave a Comment