आईपीसी धारा 143 क्या है | IPC Section 143 in Hindi – विवरण, सजा का प्रावधान

आईपीसी (IPC) धारा 143 क्या है

आज हम आपके लिए एक महत्वपूर्ण सेक्शन लेकर आये हैं जो की भारतीय दंड संहिता की धारा 143 के बारे में प्रावधान करता है | भारतीय दंड संहिता की कुछ महत्वपूर्ण धारााओं के बारे में  एक लॉ स्टूडेंट के साथ साथ आम नागरिको को के लिए भी इसको जानना उतना ही जरूरी है | हम इस लेख में आज बात करने जा रहे है IPC की धारा 143 के बारे में, यहाँ हम पूरी चर्चा करेंगे कि IPC (आईपीसी) की धारा 143 क्या है, IPC की इस धारा 143 के अंतर्गत क्या अपराध आता है साथ ही इस धारा 143 में  सजा का क्या प्रावधान बताया गया है | इसमें जमानत से सम्बंधित क्या नियम है इस विषय को भी हम यहाँ विस्तार से समझेंगे |

आईपीसी धारा 107 क्या है 

IPC (भारतीय दंड संहिता की धारा ) की धारा 143 के अनुसार :-

“विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होने पर दंड”

“जो कोई विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा “।

Section 143 IPC, as defined under the code states as

Punishment

“Whoever is a member of an unlawful assembly, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to-six months or with fine, or with both”.

आईपीसी धारा 151 क्या है

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 143 का अर्थ

यह धारा वास्तव में दंड के विषय में बताती है ये कहती है कि अगर कोई भी आदमी किसी भी गैरकानूनी (विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य) जनसमूह का सदस्य होगा तो यह अपराध के श्रेणी  में आएगा और इसके लिए सजा का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा में दंड का प्रावधान किया गया है | इसका अर्थ है कि यदि कोई किसी गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होना पाया जायेगा तो उसे इस धारा के अंतर्गत दण्डित किया जायेगा जिसमे उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे 6 महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों लगाया जायेगा | आपको बता दें कि यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

आईपीसी की धारा 143 में सजा (Punishment) क्या होगी

इस धारा 143 में अपराध के साथ दंड के बारे मे भी बताया गया है | अगर कोई व्यक्ति किसी  गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होना पाया जाता है तो यह अपराध माना जायेगा और जिसके लिए उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे 6 महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों लगाया जायेगा | आपको बता दें कि यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और यह किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। 

आईपीसी धारा 188 क्या है   

आईपीसी (IPC) की धारा 143 में  जमानत  (BAIL) का प्रावधान

अब देखते हैं कि अगर IPC की धारा 143 अप्लाई होती है जब कोई व्यक्ति किसी  गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होना पाया जाता है तब यह अपराध होगा लेकिन आपको बता दें कि यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है जिसे किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारित किया जा सकता है | अपराध जमानती प्रकृति का होने से इसमें बेल (BAIL) होगी |

आपने यहाँ इस लेख कि माध्यम से IPC की धारा 143 के विषय में  सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त की यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित कुछ भी शंका आपके मन में हो या इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप हमसे बेझिझक पूँछ सकते है |

आईपीसी धारा 34 क्या है 

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