एकतरफा तलाक (Contested Divorce) क्या है | नियम, एक तरफ़ा तलाक कैसे लिया जाए

हिन्दू धर्म में मान्यता है कि शादी के जोड़े स्वर्ग में बनकर आते हैं, और सांसारिक जीवन में वैवाहिक रिश्ते में बंधकर पति – पत्नी एक दूसरे को अपना जीवनसाथी मानते हैं | परन्तु कई बार ऐसा देखा गया है कि जल्द ही पति – पत्नी में विवाद शुरू हो जाते है, जिस वजह से शादी के रिश्ते में घुटन और ऊबन महसूस होने लगती है | फिर पति – पत्नी एक दूसरे से दूरी बनाने के लिए तलाक का माध्यम चुनते है, परन्तु तलाक लेने के लिए भी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है |

यदि कोई कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरता है कानूनी रूप से तलाक नहीं लेता है तो उसकी तलाक को नहीं माना जायेगा, परन्तु कभी – कभी स्थिति ऐसी आती है कि तलाक के लिए एक ही पक्ष सहमत होता है, दूसरा पक्ष तलाक के पक्ष में नहीं होता है, तब तलाक लेना काफी मुश्किल होता है | ऐसी स्थिति में भी एकतरफा तलाक (Contested Divorce) का कानून होता है जिसमे पति या पत्नी कोई भी पक्ष अदालत में अर्जी देकर आपसी संबंध सामाजिक और कानूनी दोनों ही प्रकार से समाप्त कर सकता हैं |

कारण बताओ (शो कॉज) नोटिस क्या है

बहुत से लोग एकतरफा तलाक (Contested Divorce) का नाम आने पर जानकारी के अभाव में तलाक के लिए अर्जी डालने में डरते है, या फिर अर्जी के लिए अदालत तक ही नहीं जाते है | यदि आप भी एकतरफा तलाक (Contested Divorce) क्या है, नियम, एक तरफ़ा तलाक कैसे लिया जाए, इसके बारे में जानना चाहते है तो यहां पर इसकी पूरी जानकारी दी गई है |

लोन एग्रीमेंट क्या होता है 

एकतरफा तलाक (Contested Divorce) क्या है

देश के संविधान में तलाक प्रक्रिया दो प्रकार की होती हैं, पहली प्रक्रिया तो आपसी सहमति से तलाक लेना आसानी से संभव किया गया है | दूसरी प्रक्रिया में एकतरफा तलाक (Contested Divorce) की अर्जी लगाई जाती है, यह प्रक्रिया काफी लम्बी और मुश्किल हो सकती है | पहली प्रक्रिया में पति – पत्नी  राजी-खुशी से संबंध खत्म कर लेते हैं | इसके अंतर्गत वाद-विवाद, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप जैसी बातें सामने नहीं आती हैं |

एकतरफा तलाक (Contested Divorce) का रास्ता अपेक्षाकृत सहमति तलाक से थोड़ा मुश्किल होता है | यहां दोनों पक्षों में कानूनी प्रक्रिया चलती है | इसके अंतरगत कुछ खास बातों को आधार बनाकर पति या पत्नी कोई भी कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी डालने का हक़दार होता है | इसके तहत शादी के अलावा यौन संबंध, शारीरिक-मानसिक क्रूरता, दो सालों या उससे अधिक समय तक अलग रहना, गंभीर यौन रोग, मानसिक अस्वस्थतता, धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों को रखा जा सकता हैं |

इसके अलावा पत्नी को अलग से तलाक के लिए संविधान में अधिकार प्रदान किये गए हैं | इसमें यदि पति  बलात्कार या अप्राकृतिक यौन संबंध जैसी क्रूरता करता है, यदि पहली पत्नी से तलाक (Divorce) लिए बगैर दूसरी शादी कर चुका हो या फिर पत्नी की शादी 18 वर्ष के पहले की गई हो तो ऐसी स्थिति में भी शादी ख़ारिज की जा सकती है |

पार्टनरशिप डीड क्या है

एकतरफा तलाक (Contested Divorce) के नियम

अगर पति या पत्नी में से कोई भी तलाक नहीं देना चाहता है तथा दूसरा पक्ष तलाक देने का पूरी तरह से इच्छुक है, तो इस पर एकतरफा तलाक (Contested Divorce) का नियम लागू किया जाता है |



सर्वप्रथम एकतरफा तलाक (Contested Divorce) की अर्जी देने के लिए तलाक याचिका का प्रारूप तैयार करना होता है, उसके बाद न्यायालय (Court) में पेश किया जाता है | इसे केवल कुछ निश्चित आधारों पर ही दिया जाने का प्रावधान है, जो कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के सेक्शन 13, के अंतर्गत उल्लेखित किये गए हैं |

इसमें दी गई परिस्तिथियाँ जिनमें तलाक के लिए न्यायालय में याचिका दायर करने के प्रावधान बनाये गए है, जो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के सेक्शन 13 (1), के तहत हैं |

बिक्री विलेख पंजीकरण            

एक तरफ़ा तलाक कैसे लिया जाए

हिंदू विवाह अधिनियम,1955 के आरम्भ होने से पूर्व या बाद में की गई किसी भी शादी के लिए तलाक, पति या पत्नी द्वारा अदालत में प्रस्तुत की गई तलाक याचिका पर किया जा सकता है, एकतरफा तलाक (Contested Divorce) प्राप्त करने के लिए कोई भी व्यक्ति न्यायालय से तलाक का आदेश पाने का हकदार होता है, इस प्रकार के मुद्दों को आधार बनाकर तलाक लिया जा सकता है:-

1. शादी होने के बाद, अपने पति या पत्नी के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति के साथ स्वैच्छिक संभोग किये जाने की स्थिति में अर्जी दी जा सकती है |

या,

(i) पति या पत्नी में से किसी के द्वारा विवाह के बाद याचिकाकर्ता के साथ क्रूरता का व्यवहार पाए जाने की स्थिति में भी अर्जी दिए जाने का प्रावधान बनाया गया है |

या,

(ii) पति या पत्नी दोनों में से एक अदालत (Court) में याचिका की प्रस्तुति के तुरंत पहले याचिकाकर्ता के साथ कम से कम दो वर्ष से न रह रहा हो |

2. इसके अलावा पति या पत्नी दोनों में से किसी एक द्वारा हिन्दू धर्म से किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण कर लिया गया हो |

या

3. दोनों में से कोई एक पागल हो या फिर किसी बिना इलाज वाली बीमारी से ग्रसित हो चुका हो, इसके अलावा किसी एक को मानसिक विकार के कारण निरंतर या कुछ समय अंतराल में दौड़ा पड़ने की स्थिति में, जिससे याचिकाकर्ता की प्रतिवादी के साथ जीवन यापन करने की उम्मीद नहीं की जा सकें।

Rental Agreement Format in Hindi   

4. पति या पत्नी दोनों में से कोई किसी विषैले रोग या कुष्ठ रोग जैसे छुआ छूट वाले रोग से पीड़ित है |

या

5. दोनों में से कोई एक किसी संक्रामक रोग से ग्रसित होने पर याचिका दायर की जा सकती है |

या

6. पति या पत्नी में से किसी एक द्वारा गृहस्थ आश्रम त्यागकर, सन्यास धारण कर ले जाने की स्थिति में |

या

7. यदि कुछ लोगों द्वारा प्रतिवादी के बारे में ज्यादातर सुना जाता रहा हो कि, सात वर्ष या उससे अधिक समय तक के लिए जीवित रहने की जानकारी नहीं पाए जाने पर।

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के सेक्शन 13, के अंतर्गत उपरोक्त बातों के आधार पर एकतरफा तलाक (Contested Divorce) के लिए प्रोसेस शुरू की जा सकती है इसके बाद फॅमिली न्यायालय द्वारा इसके बारे में निर्णीत किया जाता है |

एमओयू क्या है

मित्रों उपरोक्त वर्णन से आपको आज एकतरफा तलाक (Contested Divorce) क्या है, एक तरफ़ा तलाक कैसे लिया जाए के बारे में जानकारी हो गई होगी | इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, यदि फिर भी इससे सम्बन्धित या अन्य से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट  बॉक्स  के  माध्यम  से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है | इसको अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करें |

लीगल नोटिस क्या होता है

4 thoughts on “एकतरफा तलाक (Contested Divorce) क्या है | नियम, एक तरफ़ा तलाक कैसे लिया जाए”

  1. मेरी शादी केवल आठ दिन चली, लड़की के घरवालों ने जबरदस्ती शादी कर दी लड़की ने संबंध बनाने से मना कर दिया, लड़की अपने घरवालों से डरती है, उनके डर से बोल नहीं पाती जैसे घर वालें चाहते हैं वहीं बोलतीं है, शारीरिक संबंध नहीं बने पर घरवालों के कहने पर कहती है जबरदस्ती संबंध बनाएं,कीसी अन्य को चाहती है, लड़की के घरवालों ने मोटी रकम मांगी है, तलाक़ देने के लिए घर में सभी बहन मां पिता और मुझ पर मुकदमा कर रक्खा है मदद करें

    Reply
  2. एक वर्ष शादी को हुआ है । माहिला अभी 7 माह की गर्भवती है । वो अधिकतर पीहर ही रहती है । doctor को दिखाना हो तो खर्चा करवाने आती है । वह R A S अधिकारी है । उसको ससुराल मे insult महसूस होती है पति private कार्य करता है । उससे ज्यादा कमाता है इसलिए उन्होने रिश्ता किया है । हमने जो गहने वगैरह चढाये हैं सब ले गई जिसका हमे पता भी नहीं है । बात करने के manners नहीं है ।उसकी तनख्वाह उसके घर ही रहती है ।कहती है कि मैं गंदे environment मे नहीं रह सकती। वो केवल पति का नाम चलाना चाहती है । आप बताएं क्या हो सकता है । या delivery के बाद।

    Reply
    • GHAR NA AANE KA KARAN PUCHE….PHIR AGAR SHORTOUT KRNE KA KOI BAAT BNE TO EK SATH RAHNE KE LIYE DONO FAMILY MILKAR BAAT KRE…AUR TB HI DIVORCE KE BARE ME SOCHE….DONO LOG AGAR CHATE HAIN FINALY DIVORCE TABHI ZYADA SAHI RAHTA HAI…TO ACCHA HOGA PAHLE AAP PUCHE APNE WIFE SE JAISA BTYA HAI HUMNE AAPKO…

      AAGE HUME AAP JAROOR LIKHE AUR HUMSE APNI SAMSYAON KE BARE ME SALAH LE SAKTE HAIN…

      Reply

Leave a Comment