Rental Agreement Format in Hindi | रेंट एग्रीमेंट प्रारूप


अक्सर हम अपने शहर से बहार जब जाते हैं तो शुरुआत में हमें रहने के लिए किसी जगह की आवस्यकता होती है | ऐसे में हम कही पर जगह को तलाशने के बाद उसका किराया अर्थात रेंट तय करते हैं उसके बाद ही हम वह रहते हैं | यहाँ ध्यान देने वाली बात ये हैं कि रेंट पर घर लेते समय या कोई भी जगह लेते समय हमें एक रेंट अग्रीमेंट कि आवश्यकता होती है, आखिर क्या होता है ये रेंट अग्रीमेंट इसके बारे में आज के इस आर्टिकल में पूरी जानकारी देंगे |  जैसे कि रेंट अग्रीमेंट की आवश्यकता क्यों होती है कैसे इसको बनाया जाता है | रेंट अग्रीमेंट का फॉर्मेट क्या होता है ? रेंट में कौन अग्रीमेंट बनाने -कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए इत्यादि ?

यहाँ पर आज आपको Rental Agreement Format in Hindi | रेंट एग्रीमेंट प्रारूप (डाउनलोड) – MS Word, PDF के बारे में  पूर्ण रूप से चर्चा की गई है | इस आर्टिकल में कई प्रकार के कानूनी शब्दों को समाहित किया है जिसको अक्सर हम कोर्ट में सुनते है , साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य महत्वपूर्ण लॉ से सम्बन्धित बातों को विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से उनके बारे में भी अवलोकन कर सकते हैं |

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रेंट अग्रीमेंट क्या होता है What Is Rent/Rental Agreement

जब भी हम किराए पर कोई वस्तु लेते हैं तो उस समय किराए पर लेने और देने वाले व्यक्तिओं के बीच में जो कुछ भी समझौता होता है। उसको एक सरकारी स्टाम्प पेपर पर लिखा जाता है, पहले की बात करे तो यह समझौता जुबानी तौर पर हो जाया करता था। परन्तु आज वर्तमान समय में इस प्रकार का स्टाम्प पर लिखित समझौताहोती है इसे हम रेंट एग्रीमेंट या किरायानामा कहते हैं।

तो हम दुसरे शब्दों में रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा की बात करें तो रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा एक ऐसा दस्तावेज है। जो किसी भी प्रॉपर्टी को किराए पर देने से पहले किराएदार और मकान मालिक (Property Owner) के बीच में समझौते के तौर पर बनाया जाता है। जिस पर मकान मालिक की सभी शर्तें लिखी जाती हैं और उस पर  मकान मालिक और किराएदार अपनी सहमति देते हुए  अपने हस्ताक्षर करते हैं। यहाँ ये भी जानना बेहद जरुरी है कि सभी नियम और शर्तों पर सहमत होने के पश्चात किराएदार और मकान मालिक के बीच में किसी प्रकार का यदि भविष्य में बदलाव करने है तो इसके लिए उसे 30 दिन पहले नोटिस देना होता है।

लीगल नोटिस क्या होता है

रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा बनाने के लिए क्या होंगे डॉक्यूमेंट/ दस्तावेज

  • किराएदार मकान मालिक दोनों का आधार कार्ड की फोटो कॉपी एवं ओरिजिनल |
  • दो गवाह एवं गवाहों के आइडेंटी प्रूफ के रूप में आधार कार्ड की फोटो कापी एवं ओरिजिनल |
  • गवाहों की उम्र 18 वर्ष से ऊपर होनी चाहिए।
  • स्टांप पेपर |
  • किराएदार मकान मालिक का पासपोर्ट साइज फोटो |
  • मकान का किराया एवं सिक्योरिटी धनराशि |

प्रमुख कानूनी शब्दावली

किरायानामा कैसे बनवाएं? How to make a Rent-Agreement?

किरायानामा (Rent-Agreement) बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है-

(1) अगर आप किरायानामा नोटरी से बनवाना चाहे तो,हमेशा ₹100 के स्टांप पेपर पर ही बनवाना चाहिए। जनरल एग्रीमेंट स्टैंप पेपर एक्ट के अनुसार यह आवश्यक माना गया है।

(2) किरायानामा बनवाते समय पूरी सही जानकारी देना और लिखना आवश्यक है।जैसे दिन, तारीख,समय आदि।

(3) किरायानामा के समय आधार कार्ड/ पहचान पत्र (ID) होना भी जरूरी है। स्टांप पेपर पर किराएदार और मकान मालिक के हस्ताक्षर अनिवार्य है।

(4) इस बात का ध्यान रखा जाए कि किरायानामा के समय दो गवाह आवश्यक रूप से मौजूद हैं।

(5) किरायानामा के समय दोनों पक्षों का पता नाम साफ-साफ लिखा होना चाहिए। आधार कार्ड में लिखा पता भी उपलब्ध होना अनिवार्य है।

(6) किरायानामा में इस बात का भी उल्लेख होना चाहिए कि किराया देर से लेने पर कितनी पेनल्टी देनी होगी?

(7) किराएदार द्वारा दिया गया सिक्योरिटी मनी का भी उल्लेख होना अनिवार्य है।

(8) मकान मालिक द्वारा किराएदार को जो भी जरूरी सुविधा दी जा रही हो उसका भी उल्लेख किरायानामा में होना आवश्यक है। जैसे– बिजली, पानी आदि।

(9) घर छोड़े जाने की स्थिति में 30 दिन का लीगल नोटिस भी देना अनिवार्य होता है।

(10) ज्यादातर मकान मालिक अपने किराए में प्रतिवर्ष 10% की बढ़ोतरी कर देते हैं। इस बात का उल्लेख किराए नामे में होना चाहिए।

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11 महीने का ही क्यों होता है रेंट एग्रीमेंट? क्या है इसकी वजह

रेंट एग्रीमेंट 1 महीने से लेकर 11 साल के लिए भी बनवाया जा सकता परंतु ज्यादातर लोग इसे 11 महीने के लिए बनाते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि यदि प्रॉपर्टी लीज एग्रीमेंट को 11 महीने से ज्यादा अवधि के लिए तैयार किया जाएगा तो फिर इसे रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर्ड भी कराना होगा। सभी राज्यों में इसके लिए टैक्स लिया जाता है। इसलिए  टेक्स (Tax) को बचाने के लिए रेंट एग्रीमेंट अधिकतम 11 महीने के लिए ही बनाया जाता है।

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रेंट एग्रीमेंट / किरायानामा का प्रारूप

इकरारनामा बाबत किराया/किरायानामा –

वार्षिक किराया                                                       रूपये

स्टाम्प                                                                     रूपये

स्टाम्प क्रमांक दिनांक

स्टाम्प की संख्या

किरायानामा आज दिनांक ———————————– को श्री/श्रीमती —————————————-

पत्र/पत्री/धर्मपत्नी/विधवा——————– आय वर्ष ——————– निवासी —————-तहसील ————-

जिला —————– राज्य——————- । (प्रथम पक्ष/मालिक)

श्री/श्रीमती ——————- पुत्र/पत्री/धर्मपत्नी/विधवा—— आयु वर्ष —— निवासी ——तहसील —– जिला —— राज्य——————(द्धितीय पक्ष/ किरायेदार ) के बीच निष्पादित किया गया है/लिखा गया है ।

जो कि प्रथम पक्ष अनुसूची मे दर्शाया गया है, एक मकान/प्लाट/फलेट/दुकान/फैक्टरी /उद्योगिक प्लाट/जिसका प्रथम पक्ष मालिक व काबिज है। जिस पर किसी प्रकार का कोई भार नहीं है । अनुसूची मे दर्शाई गई अचल संपति पर किसी प्रकार का कोई कर्जा, किसी बैंक या सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्था से प्राप्त नही किया हुआ । संबंधित अचल संपति किसी नीलामी व कुर्की आदि मे शामिल नही है । संबंधित अचल संपति को आज से पहले किसी प्रकार से रहन-बैय-हिब्बा व अन्य तरीके पर हस्तान्तरित नही किया गया है । अचल संपति को किराये पर देने की बावत किसी प्रकार की कोई रूकावट किसी विभाग या किसी न्यायालय की नहीं है । उक्त अचल संपति पर प्रथम पक्ष का कब्जा दिनांक ————— से बतौर किरायेेदार राशि——————- रू0 प्रति मास पर बतौर किराये के रूप मे देनी स्वीकार की है । जिसकी बावत किरायानामा दिनांक ————– को किया गया है । जिसका किरायानामा निष्पादित करना प्रथम पक्ष व द्धितीय पक्ष उचित समझते है । इसलिए अब प्रथम पक्ष व द्धितीय पक्ष उक्त किरायानामा दिनांक ————— तक के लिये निष्पादित करते है कि प्रथम पक्ष ने अपनी उक्त राशि —————- रू0 प्रति मास किराये पर द्धितीय पक्ष को निम्नलिखित शर्तो पर दी है : –

  1. यह है कि मौके पर कब्जा द्धितीय पक्ष का दिनांक ————– से दे दिया है और यह किरायानामा दिनांक —————- तक की अवधि तक वैध रहेगा ।
  2. किराया की इस अवधि के दौरान द्धितीय पक्ष किराये के रूप मे प्रथम पक्ष को ————— रू0 प्रति मास के हिसाब से हर मास की ————————————–. तिथि तक अग्रिम रूप मे प्रथम पक्ष को नगद प्रदान कर देगा ।
  3. यह है कि उक्त अवधि के दौरान सरकारी लगान, पानी एवं बिजली का खर्च द्धितीय पक्ष स्वंय वहन करता रहेगा । जिसके बारे मे प्रथम पक्ष कोई आपत्ति उत्पन्न नही करेगा ।
  4. यह है कि उक्त अवधि समाप्त होने पर द्धितीय पक्ष, प्रथम पक्ष को वापिस कर देगा ।
  5. यह है कि उक्त अवधि के दौरान भुगतान की रसीद प्रथम पक्ष्, द्धितीय पक्ष को देगा ।
  6. यह है कि उक्त अवधि के दौरान प्रथम पक्ष व द्धितीय पक्ष के बीच कोई विवाद होता है तो पंच फैसला दोनो पक्षो को मान्य होगा ।
  7. यह है कि द्धितीय पक्ष ने —————————— रूपये (शब्दो में——————रूपये) केवल नगद प्रथम पक्ष को बतौर जमानत के रूप मे अदा कर दिये है जो कि बिना किसी ब्याज के प्रथम पक्ष द्धितीय पक्ष को सम्बन्धित अचल सम्पति के खाली करने के समय बकाया किराया व अन्य देनदारी आदि काट कर वापिस कर देगा ।
  8. यह है कि उपरोक्त म्यांद के बाद यदि किरायेदारी की म्यांद बढ़ाई जाती है तो प्रत्येक मास——– के बाद —– प्रतिशत की दर से किराये मे वृद्धि होगी तथा किरायेदारी की म्यांद केवल प्रथम पक्ष की सहमति द्वारा ही बढ़ाई जा सकेगी ।
  9. यह है कि द्धितीय पक्ष सम्बन्धित अचल सम्पति को केवल——— कार्य के लिए इस्तेमाल करेगा ।
  10. यह है कि द्धितीय पक्ष सम्बन्धित अचल सम्पति पर या इसकी किसी भी निर्माण मे किसी भी किस्म की कोई तोडफोड या नया निर्माण नही करेगा तथा किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर नही देगा तथा प्रथम पक्ष को हक होगा कि वह किसी भी समय निरीक्षण के लिए आ सकता है जिसका द्धितीय पक्ष को कोई आपत्ति नही होगी तथा द्धितीय पक्ष कोई ऐसा कार्य नही करेगा जो कि कानून की नजरों मे गल्त होगा ।
  11. यह है कि सम्बन्धित अचल सम्पति मे छोटी मुरम्मत जैसे कि बिजली की तारों मे परेशानी, पानी की लीकेज आदि द्धितीय पक्ष स्वंय करेगा ।
  12. यह है कि जब भी किसी पक्ष को उपरोक्त अचल सम्पति को खाली करना या कराना हो तो वह दूसरे पक्ष को दो महिने पहले नोटिस देगा ।
  13. यह है कि उपरोक्त किराया नामा के दोनो पक्ष व उनके वारसान आदि हमेशा पाबन्द रहेगे तथा इसकी शर्तो का पालन करेगें ।
  14. अतः यह किराया नामा लिख दिया है कि बतौर साक्षी प्रमाण रहे ताकि समय पर काम आये ।

दिनांक——————

अनुसूचि ( पहचान के लिये अचल सम्पति का विवरण)

नक्शा सीमा व पैमाईश मकान /प्लाट/फलेट/दुकान/फैक्टरी/उद्योगिक प्लाट के केस में

पूर्व : –   —————————- फुट————————————- इंच————————————।

पश्चिम :-   ————————- फुट————————————– इंच————————————।

उतर :-   —————————फुट————————————– इंच————————————।

दक्षिण :-  ————————–फुट————————————– इंच————————————।

स्थित—————————–

साक्षीगणः                                                                                                     हस्ताक्षर प्रथम पक्ष

1.

2.                                                                                                               हस्ताक्षर द्धितीय पक्ष

सरकारी वकील क्या होता है

rent agreement

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वकील (अधिवक्ता) कैसे बने

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3 thoughts on “Rental Agreement Format in Hindi | रेंट एग्रीमेंट प्रारूप”

  1. how can owner proof his ownership on property , through electricity water bills ? and its true rent agreement can made without proof of ownership , witnesses and govt Ids are enough?

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