आईपीसी धारा 109 क्या है | IPC Section 109 in Hindi – विवरण, सजा का प्रावधान

आईपीसी धारा 109 क्या है

भारतीय दंड संहिता में दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है का प्रावधान (IPC) की धारा 109 में  किया गया है | यहाँ हम आपको ये बताने का प्रयास करेंगे कि भारतीय दंड सहिता (IPC) की धारा 109 किस तरह अप्लाई होगी | भारतीय दंड संहिता यानि कि IPC की धारा 109 क्या है ? इसके सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से यहाँ समझने का प्रयास करेंगे | आशा है हमारी टीम द्वारा किया गया प्रयास आपको पसंद आ रहा होगा |

आईपीसी धारा 107 क्या है

(IPC Section 109) दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए

इस पेज पर भारतीय दंड सहिता की धारा 109 में “दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है के बारे में क्या प्रावधान बताये गए हैं, और इसमें कितनी सजा देने की बात कही गई है? इनके बारे में पूर्ण रूप से इस धारा में चर्चा की गई है | साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 109 में जमानत के बारे में क्या बताया गया है ? इसको भी यहाँ जानेंगे, साथ ही इस पोर्टल www.nocriminals.org पर अन्य महत्वपूर्ण धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया है आप उन आर्टिकल के माध्यम से अन्य धाराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी  ले सकते हैं |

आईपीसी धारा 100 क्या है 

IPC (भारतीय दंड संहिता की धारा ) की धारा 109 के अनुसार :-

दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है–

“जो कोई किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित कार्य दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाता है, और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए इस संहिता द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं किया गया है, तो वह उस दण्ड से दण्डित – किया जाएगा, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है “।

स्पष्टीकरणकोई कार्य या अपराध दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया तब कहा जाता है, जब वह उस उकसाहट के परिणामस्वरूप या उस षडयंत्र के अनुसरण में या उस सहायता से किया जाता है, जिससे दुष्प्रेरण गठित होता है |

दृष्टांत

(क) ख को, जो एक लोक सेवक है, ख के पदीय कृत्यों के प्रयोग में क पर कुछ अनुग्रह दिखाने के लिए इनाम के रूप में क रिश्वत की प्रस्थापना करता है । ख वह रिश्वत प्रतिगृहीत कर लेता है । क ने धारा 161 में परिभाषित अपराध का दुष्प्रेरण किया है।

(ख) ख को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए क उकसाता है । ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप, वह अपराध करता है | क उस अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है, और उसी दण्ड से दण्डनीय है जिससे ख है ।

(ग) य को विष देने का षडयंत्र क और ख रचते हैं | क उस षडयंत्र के अनुसरण में विष उपाप्त करता है और उसे ख को इसलिए परिदत्त करता है कि वह उसे य को दे । ख उस षडयंत्र के अनुसरण में वह विष क की अनुपस्थिति में य को दे देता है और उसके द्वारा य की मृत्यु कारित कर देता है । यहां, ख हत्या का दोषी है । क षडयंत्र द्वारा उस अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है, और वह हत्या के लिए दण्ड से दण्डनीय है।

According to Section. 109 – “Punishment of abetment if the act abetted is committed in consequence and where no express provision is made for its punishment”–

“Whoever abets any offence shall, if the act abetted is committed in consequence of the abetment, and no express provision is made by this Code for the punishment of such abet­ment, be punished with the punishment provided for the offence”.

Explanation.—An act or offence is said to be committed in conse­quence of abetment, when it is committed in consequence of the instigation, or in pursuance of the conspiracy, or with the aid which constitutes the abetment.

Illustrations

(a) A offers a bribe to B, a public servant, as a reward for showing A some favour in the exercise of B’s official functions. B accepts the bribe. A has abetted the offence defined in section 161.

(b) A instigates B to give false evidence. B, in consequence of the instigation, commits that offence. A is guilty of abetting that offence, and is liable to the same punishment as B.

(c) A and B conspire to poison Z. A in pursuance of the conspira­cy, procures the poison and delivers it to B in order that he may administer it to Z. B, in pursuance of the conspiracy, adminis­ters the poison to Z in A’s absence and thereby causes Z’s death. Here B is guilty of murder. A is guilty of abetting that offence by conspiracy, and is liable to the punishment for murder.

आईपीसी धारा 120 क्या है

लागू अपराध (IPC Section 109)

दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है

सजा – अपराध के अनुसार।

इसकी जमानत, संज्ञान और अदालती कार्रवाई अपराध अनुसार होगी।

यह समझौता करने योग्य नहीं है।

स्पष्टीकरण– कोई कार्य या अपराध दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया तब कहा जाता है, जब वह उस उकसाहट के परिणामस्वरूप या उस षडयंत्र के अनुसरण में या उस सहायता से किया जाता है, जिससे दुष्प्रेरण संस्थापित होता है।

आईपीसी धारा 143 क्या है

आईपीसी की धारा 109 में सजा (Punishment) क्या होगी

“अपराध के लिए उकसाने के लिए दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है” के लिए दंड का निर्धारण  भारतीय दंड संहिता में धारा 109 के तहत किया गया है | यहाँ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 109 में सजा – अपराध के अनुसार दी जाएगी | यह समझौता करने योग्य नहीं है।

आईपीसी धारा 144 क्या है 

आईपीसी (IPC) की धारा 109 में  जमानत  (BAIL) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 109 में जिस अपराध की सजा के बारे में बताया गया है इसमें, इसकी जमानत, संज्ञान और अदालती कार्रवाई अपराध अनुसार होगी। जिस प्रकार का अपराध गठित होगा |

आपको आज भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 109 के बारे में जानकारी हो गई होगी | इसमें  क्या अपराध बनता है, कैसे इस धारा को लागू किया जायेगा | इस अपराध को कारित करने पर क्या सजा होगी ?  इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, साथ ही इसमें जमानत के क्या प्रावधान होंगे ? यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप  हमें  कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है |

आईपीसी धारा 147 क्या है

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
अपराध के लिए दुष्प्रेरण, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।उस अपराध के समान जिसके लिए उकसाया गयाउस अपराध के समान जिसके लिए उकसाया गयाउस अपराध के समान जिसके लिए उकसाया गयाउस अदालत के द्वारा जिसमे उकसाया गया अपराध जाने योग्य है विचारणीय

आईपीसी धारा 149 क्या है

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