एफआईआर (FIR) क्या होता है | प्राथमिकी का फुल फॉर्म | प्रक्रिया | नियम की जानकारी

एफआईआर (FIR) क्या है

भारत एक संवैधानिक देश है, जो संविधान द्वारा बनाये गए नियमों के अनुसार चलता है | संविधान में देश के प्रत्येक  नागरिक को मूल अधिकार दिए गए है, जिसके अनुसार उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं हो सकता है, यदि देश में सामान्य स्थिति के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा यदि मूल अधिकारों का हनन करते पाया जाता है, या फिर लड़ाई झगड़ा करता है या फिर संविधान द्वारा बनाये गए नियमों का उल्लंघन करता है, इसके अलावा किसी भी मामले में अपराधी होता है तो उसके खिलाफ कार्यवाई की जाती है |

किसी भी कार्यवाही को करने से पहले उसके ऊपर संविधान द्वारा दिए गए अनुच्छेदों के अनुसार एक एफआईआर (FIR) दर्ज की जाती है | किसी भी व्यक्ति पर कोई भी कार्यवाही करने से पहले पुलिस द्वारा एफआईआर (FIR) का दस्तावेज लिखा जाता है | यदि आप भी एफआईआर (FIR) क्या होता है, प्राथमिकी का फुल फॉर्म, प्रक्रिया, नियम की जानकारी, के विषय में जानना चाहते है तो इसकी जानकारी दी जा रही है |

जीरो एफआईआर (Zero FIR) क्या है

प्राथमिकी (FIR) का फुल फॉर्म

एफआईआर (FIR) का फुल फॉर्म “First Investigation Report” होता है, इसका हिंदी में उच्चारण “फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन रिपोर्ट” होता है” तथा इसका मतलब “प्रथम सूचना विवरण” होता है | इसे प्राथमिकी सूचना भी कहा जाता है | किसी भी व्यक्ति के ऊपर एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद ही कार्यवाही की जा सकती है |

एफआईआर (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया

किसी भी व्यक्ति को एफआईआर (FIR) दर्ज कराने हेतु स्वयं जाने की भी जरूरत नहीं होती है। किसी भी घटना में चश्मदीद गवाह या फिर कोई रिश्तेदार भी प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज कराने का अधिकार रखता है। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में पुलिस फोन कॉल (राज्य सरकार द्वारा जारी किया गया हेल्पलाइन नम्बर के माध्यम से) या फिर ई-मेल के जरिये भी प्राथमिकी दर्ज करवा सकते है। एफआईआर (FIR) दर्ज करवाने में घटना की तिथि और समय व आरोपी के बारे में मालूम पूरी जानकारी को लिखवाना होता है। एफआईआर (FIR) दर्ज हो जाने के बाद शिकायतकर्ता को इसकी एक कॉपी भी दी जाती है। एफआईआर में एक क्राइम नंबर लिखा होता है जो भविष्य में रेफरेंस के लिए  इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी व्यक्ति द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी पर थाने की मुहर व पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर होने जरूरी होता है।

ऑनलाइन एफआईआर कैसे दर्ज़ करे

FIR दर्ज होने के मामले

किसी पर भी FIR दर्ज करवाने के पूर्व यह जानना आवश्यक होता है कि किस तरह के मामलों में दर्ज करवा सकते है। अपराध के मामलों को दो श्रेणी में रखा गया हैं, यह असंज्ञेय और संज्ञेय दोनों प्रकार में एक अपराध हो सकता है | असंज्ञेय अपराधों को मामूली अपराध माना जाता हैं इनमें मामूली मारपीट आदि के मामले हो सकते हैं। इन मामले में सीधे एफआईआर नहीं दर्ज करवाई जा सकती है, बल्कि शिकायत पत्र को मैजिस्ट्रेट के रेफर कर दिया जाता है | जिसके बाद मैजिस्ट्रेट मामले में आरोपी को समन भी जारी कर सकता है। यानी की ऐसे मामले में जूरिस्डिक्शन हो या न हो किसी भी हाल में केस दर्ज नहीं किया जा सकता है। दूसरा अपराध संज्ञेय अपराध होता है जो सभी गंभीर मामलों पर केस दर्ज होते  हैं। ऐसे मामले में गोली चलाना, मर्डर व रेप आदि कोई भी हो सकते हैं, जिनमें सीधे एफआईआर दर्ज की जाती है। 

शपथ पत्र (Affidavit) क्या होता है

जीरो एफआईआर क्या होती है

यदि शिकायतकर्ता के साथ हुआ अपराध उस थाने की जूरिस्डिक्शन में नहीं हुआ होता है, जहां परशिकायती, शिकायत लेकर जाता है, तब ऐसी स्थिति में भी पुलिस को शिकायतकर्ता की शिकायत के बेस पर मामलें को दर्ज करना होगा। ऐसी स्थिति में शिकायत को क्षेत्र से संबंधित थाने में जल्द ही ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस तरह की प्राथमिकी को ZERO FIR कहा जाता है। जब भी कोई ZERO FIR दर्ज की जाती है और मामला संज्ञेय अपराध का हो होता है, तो पुलिस न सिर्फ एफआईआर करेगी बल्कि वह शुरुआती जांच भी करती है ताकि शुरुआती साक्ष्य यानि कि सबूत न नष्ट न हों | ZERO FIR कहलाती है |

आरोप पत्र क्या होता है

Leave a Comment